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डिजिटल अरेस्ट केवल एक भ्रम: सागर साहित्य महोत्सव में एएसपी लोकेश सिन्हा ने साइबर ठगों की खोली पोल

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डिजिटल अरेस्ट केवल एक भ्रम: सागर साहित्य महोत्सव में एएसपी लोकेश सिन्हा ने साइबर ठगों की खोली पोल


सागर, 26 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में गुरुवार को आयोजित “सागर साहित्य महोत्सव एवं पुस्तक मेला” के मंच से आज साइबर सुरक्षा को लेकर एक सशक्त और प्रभावी संदेश दिया गया। अजीज फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस विशेष टॉक शो में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया।

एएसपी लोकेश सिन्हा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई वैधानिक अवधारणा या प्रक्रिया कानून में मौजूद नहीं है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी खुद को CBI, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों को घंटों एक कमरे में बंद रहने और कैमरे के सामने रहने पर मजबूर करते हैं। यह पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर पैसे वसूलने का एक हथकंडा है।

यदि कोई आपको कॉल पर डराए या खुद को अधिकारी बताकर 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी दे, तो तुरंत कॉल काटें। आधिकारिक एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या कार्रवाई नहीं करतीं। — लोकेश कुमार सिन्हा, एएसपी सागर

कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दोहरे पहलुओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि जहाँ AI कार्यों में सटीकता और तेजी ला रहा है, वहीं इसका दुरुपयोग डीपफेक वीडियो और वॉइस क्लोनिंग के जरिए लोगों को ठगने में किया जा रहा है। साइबर फॉरेन्सिक विशेषज्ञ समीर बलैया ने तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए संदिग्ध लिंक और ऐप्स से दूर रहने की सलाह दी।

इस टॉक शो में बीटी इंस्टिट्यूट के प्राचार्य राजू टंडन, अधिवक्ता वरुण कुमार प्रधान और आयोजन समिति के आशुतोष उपाध्याय व चंदन जी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की विशेषता इसका संवादात्मक सत्र रहा, जहाँ नागरिकों ने अपने साथ हुए साइबर फ्रॉड के अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने सागर में बढ़ते OTP फ्रॉड, फिशिंग और KYC अपडेट के नाम पर होने वाली ठगी के उदाहरण देकर लोगों को सतर्क किया।

एएसपी सिन्हा ने अपील की कि यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है, तो वह बिना डरे तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराए। शुरुआती घंटों (Golden Hours) में दी गई सूचना से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी अधिक रहती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे