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सागर के बंडा में जहरीली शराब से मौतों पर कुणाल चौधरी ने सरकार को घेरा, आबकारी और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

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सागर के बंडा में जहरीली शराब से मौतों पर कुणाल चौधरी ने सरकार को घेरा, आबकारी और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग


भोपाल, 06 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली और नकली शराब पीने से हुई मौतों के मामले को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने घटना को गंभीर बताते हुए आबकारी मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

कुणाल चौधरी ने रविवार काे प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता काे संबाेधित करते हुए कहा कि सरकारी आंकड़ों में मृतकों की संख्या 11 बताई जा रही है, जबकि मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह संख्या इससे अधिक हो सकती है। उन्होंने 24 से अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने का दावा करते हुए कहा कि अवैध शराब के कारोबार पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर में पकड़े गए आरोपियों से बंडा में जहरीली शराब की आपूर्ति से जुड़ी जानकारी सामने आने के बावजूद मध्य प्रदेश में पुलिस और आबकारी विभाग ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक बताया।

पुराने मामलों का हवाला देकर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने कहा कि वर्ष 2021 में भी जहरीली शराब से मौतों की घटना सामने आई थी। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने प्रदेश में अवैध शराब और ड्रग्स के कारोबार को लेकर भी सरकार से प्रभावी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बालाघाट, छिंदवाड़ा के कफ सिरप मामले, इंदौर में दूषित पानी से जुड़ी घटनाओं, एमवाय अस्पताल की व्यवस्थाओं, बावड़ी हादसे और हरदा पटाखा विस्फोट जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग घटनाओं में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित विभागों के राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

एसआईटी जांच और मुआवजे पर भी सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि गंभीर घटनाओं के बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की जाती है, लेकिन जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती। उन्होंने सरकार से पुरानी एसआईटी जांचों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि जहरीली शराब से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देना जरूरी है, लेकिन मुआवजा सरकार की जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता।

कुणाल चौधरी ने सरकार से मांग की

आबकारी और स्वास्थ्य मंत्री की जवाबदेही तय की जाए और उनके इस्तीफे पर निर्णय लिया जाए।

आबकारी कमिश्नर सहित जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जाए।

जहरीली शराब की आपूर्ति और पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो।

अवैध शराब और ड्रग्स के नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और प्रभावित लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री पूरे मामले में प्रशासनिक और राजनीतिक जवाबदेही स्पष्ट करें।

कुणाल चौधरी ने कहा कि बंडा की घटना को केवल एक स्थानीय हादसे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और पूरे तंत्र की जवाबदेही तय करना जरूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे