सागर में बकरीद की धूम: जगह कम पड़ी तो सड़क पर पढ़ी गई नमाज, मस्जिदों में उमड़ी भीड़
सागर, 28 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में गुरुवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार पारंपरिक सादगी, अकीदत और भाईचारे के साथ मनाया गया। इस खास मौके पर मुस्लिम समुदाय के हजारों लोगों ने सुबह-सुबह मुख्य ईदगाह और शहर की विभिन्न मस्जिदों में एकत्र होकर ईद की विशेष नमाज अदा की। नमाज के दौरान देश में सुख-समृद्धि, शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए सामूहिक दुआएं मांगी गईं।
बकरीद के मुख्य मौके पर मोतीनगर चौराहा स्थित लेहदरा नाका ईदगाह मैदान एवं कटरा मस्जिद में सुबह से ही अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। देखते ही देखते परिसर पूरी तरह भर गया और वहां जगह कम पड़ गई। इसके बाद बड़ी संख्या में नमाजियों ने सड़क पर सफें बिछाईं और पूरी अकीदत के साथ नमाज अदा की। नमाज मुकम्मल होने के बाद हर तरफ खुशी का माहौल देखा गया। लोगों ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया और ईद की मुबारकबाद दी।
त्योहार को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। शहर के संवेदनशील चौराहों और मस्जिदों के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। कटरा जामा मस्जिद पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज पढ़ी, जहाँ मस्जिद के बाहर सड़क तक नमाजी बैठे नजर आए। आला अधिकारी लगातार पेट्रोलिंग कर स्थिति का जायजा लेते रहे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, ईद-उल-अजहा का पवित्र त्योहार आत्मसमर्पण और कुर्बानी का प्रतीक है। माना जाता है कि इसी दिन हजरत इब्राहिम, अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने जा रहे थे। उनकी इस अटूट निष्ठा और समर्पण को देखकर अल्लाह ने उनके पुत्र को जीवनदान दे दिया और वहां एक दुम्बा (भेड़) प्रकट हो गया। इसी ऐतिहासिक घटना और खुदा के प्रति वफादारी की याद में हर साल बकरीद पर कुर्बानी देने की परंपरा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे

