रूसी छात्राओं के शुद्ध हिंदी काव्य-पाठ से गूंजी महाकाल की नगरी , अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में तालियों की गड़गड़ाहट
उज्जैन, 21 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में बुधवार को हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रति विदेशी छात्रों का अनुराग उस समय देखने को मिला, जब रूस की छात्राओं ने शुद्ध हिंदी उच्चारण के साथ प्रसिद्ध हिंदी कविताओं का सस्वर पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अवसर था सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन तथा रशियन विश्वविद्यालय मॉस्को, द पुश्किन इंस्टीट्यूट ऑफ रशियन लैंग्वेज और रशियन हाउस, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अनुवाद विमर्श एवं कार्यशाला का।
कार्यक्रम की शुरुआत में रूस की छात्रा अनास्टेसिया शीतिकोवा ने महादेवी वर्मा की प्रसिद्ध कविता “जो तुम आ जाते एक बार…” का भावपूर्ण और शुद्ध हिंदी उच्चारण के साथ पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने सभागृह में उपस्थित श्रोताओं को चौंका दिया और कविता समाप्त होते ही पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मास्को स्थित रूसी विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा का अध्ययन कर रहीं छात्रा मारग्रेटा एरमलयुले ने हरिवंश राय बच्चन की कविता “बैठ जाता हूँ मिट्टी पर अक्सर…” का प्रभावशाली काव्य-पाठ किया, जिसे भी श्रोताओं ने खूब सराहा।
इसी कड़ी में मॉस्को विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रा एलिना शक्लोव ने सचिदानंद अज्ञेय की कविता का हिंदी पाठ कर यह साबित किया कि हिंदी भाषा की सुगंध अब सीमाओं से परे पहुंच चुकी है। इन प्रस्तुतियों ने हिंदी-रूसी सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को सजीव रूप में सामने रखा।
संगोष्ठी की मुख्य अतिथि रूस से आईं डॉ. इंदिरा गजेविया ने अपने उद्बोधन में अनुवाद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनुवाद केवल भाषा परिवर्तन नहीं, बल्कि संस्कृतियों के बीच सेतु का कार्य करता है। उन्होंने अनुवाद विज्ञान और उसके व्यावहारिक पक्षों पर भी विस्तार से चर्चा की। मॉस्को विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. इंद्रजीत सिंह ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी-रूसी अनुवाद के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और आने वाला समय इस दिशा में नई उपलब्धियां लेकर आएगा।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि रूस और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंधों का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। अब शैक्षणिक और भाषाई आदान-प्रदान का नया दौर उज्जैन से शुरू हो रहा है, जो दोनों देशों के शिक्षा संस्थानों में नई क्रांति लाएगा। उन्होंने कहा कि अनुवाद न केवल भाषाओं, बल्कि देशों और संस्कृतियों को भी जोड़ता है।
इस अवसर पर सागर विश्वविद्यालय की ज्योत्सना शुक्ला, मीती शर्मा, पुलकीता आनंद सहित विदेशी भाषा विभाग के विद्यार्थियों ने रूसी गीत एवं नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संचालन रूसी भाषा संकाय की समन्वयक निशा चौरसिया ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. रोनाल्ड फ्रेंकलिन ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

