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13 साल से अधूरी त्यौंथर फ्लो परियोजना पर जगी उम्मीद, मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

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13 साल से अधूरी त्यौंथर फ्लो परियोजना पर जगी उम्मीद, मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य


रीवा, 15 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले की त्यौंथर फ्लो सिंचाई परियोजना का इंतजार कर रहे किसानों के लिए अब उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। तीन साल में पूरी होने वाली इस परियोजना को शुरू हुए 13 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसका काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। भू-अर्जन की अड़चनों और निर्माण में देरी के कारण परियोजना लगातार पिछड़ती रही। अब प्रशासन ने भूमि संबंधी विवादों को सुलझाने की पहल की है, वहीं परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

वर्ष 2013 में शुरू हुई इस परियोजना को वर्ष 2016 तक पूरा किया जाना था। शुरुआती दौर में निर्माण एजेंसी की धीमी गति और बाद में भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण काम प्रभावित होता रहा। स्थिति यह है कि 58 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन माइनर और सब माइनर नहरों का काम अब भी शेष है। इसके अलावा दो स्ट्रक्चर का निर्माण भी पूरा किया जाना बाकी है।

भू-अर्जन की समस्या बनी सबसे बड़ी बाधा

त्यौंथर फ्लो परियोजना के निर्माण में सबसे बड़ी परेशानी भूमि अधिग्रहण को लेकर सामने आई है। नहर निर्माण के लिए कुछ स्थानों पर भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी, जबकि कुछ जगहों पर जमीन को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते मुख्य नहर का काम पूरा होने के बावजूद इससे जुड़े छोटे नहर नेटवर्क का निर्माण अटका रहा।

सूत्रों के अनुसार, परियोजना के शुरुआती चरण में निर्माण एजेंसी ने अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई। संबंधित अधिकारियों की ओर से भी काम शुरू कराने में गंभीरता की कमी रही। इन कारणों से निर्धारित समयसीमा में परियोजना पूरी नहीं हो सकी और इसे बार-बार आगे बढ़ाना पड़ा।

अब भू-अर्जन से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए प्रशासन ने कदम उठाए हैं। जिन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की समस्या या विवाद हैं, उन्हें सुलझाने के लिए कलेक्टर ने संबंधित एसडीएम को निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि इन मामलों का निराकरण होने से नहरों के शेष निर्माण कार्य को गति मिल सकती है।

छह बार बढ़ाई जा चुकी है समयसीमा

परियोजना की लेटलतीफी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे अब तक लगभग छह बार समयवृद्धि दी जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा है। फिलहाल नहर के 52वें और 55वें किलोमीटर पर बनने वाले स्ट्रक्चर का काम किया जा रहा है। अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के स्तर पर प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, निर्माण एजेंसी को शेष काम निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी आधार पर मार्च 2027 तक परियोजना पूरी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, लंबे समय से चल रही देरी के बीच तय समयसीमा में काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

343 गांवों तक पहुंचेगा बाणसागर का पानी

करीब 254 करोड़ रुपये की लागत वाली इस सिंचाई परियोजना का उद्देश्य त्यौंथर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। परियोजना पूरी होने के बाद बाणसागर के पानी से 44,450 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे 343 गांवों तक नहरों के माध्यम से पानी पहुंच सकेगा।

जिन इलाकों में नहरों का निर्माण पूरा हो चुका है, वहां सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा रहा है। लेकिन परियोजना का पूरा लाभ तभी मिल सकेगा, जब शेष माइनर और सब माइनर नहरों का निर्माण भी पूरा हो जाएगा। इससे उन क्षेत्रों के किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जहां अभी तक बाणसागर का पानी नहीं पहुंच पाया है।

किसानों को लंबे समय से परियोजना पूरी होने का इंतजार

रीवा जिले का त्यौंथर क्षेत्र तराई अंचल में स्थित है और जिले के अंतिम छोर का हिस्सा होने के कारण यहां सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में त्यौंथर फ्लो परियोजना को क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा के रूप में देखा जा रहा है।

परियोजना पूरी होने की उम्मीद में लंबे समय से इंतजार कर रहे किसानों को अब शासन और प्रशासन की ओर से मार्च 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य दिए जाने से राहत की आस बंधी है। हालांकि, छह बार समयसीमा बढ़ने के बाद अब किसानों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भू-अर्जन की समस्याओं का कितनी जल्दी समाधान होता है और शेष निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा हो पाता है या नहीं।

परियोजना के पूरा होने से न केवल सिंचाई के दायरे में विस्तार होगा, बल्कि उन गांवों के किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से नहर के पानी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी