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रीवाः न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में जल सत्याग्रह कर रही महिला की मौत

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रीवाः न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में जल सत्याग्रह कर रही महिला की मौत


रीवा, 22 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में जल सत्याग्रह कर रही आदिवासी महिला विमला कोल की गुरुवार को मौत हो गई।

उनके पति जमुना कोल ने बताया कि विमला शुरू से ही ग्रामीणों के साथ मिलकर प्लांट का विरोध कर रही थीं। कुछ दिन से ग्रामीण जल सत्याग्रह कर रहे थे। यानी हर दिन कुछ ग्रामीण गांव के तालाब में खड़े हो जाते थे।वह करीब 4 दिन से लगातार जल सत्याग्रह में हिस्सा ले रहीं थी। कल रात अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां आज उनकी मौत हो गई।

जमुना कोल ने बताया कि आज उन्होंने अपने हाथों से पत्नी को मुखाग्नि दी। पत्नी की मौत के बाद वह गहरे सदमे में हैं।उन्होंने कहा- सब कुछ लुट गया। सब कुछ बर्बाद हो गया। क्या प्रशासन मेरी पत्नी को मुझे लौटा सकता है। क्या उसे जिंदा कर सकता है।

सरई कला- रोझौही में प्रस्तावित है परियोजना

जिले के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं।ग्रामीणों को जमीन, पानी, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों की चिंता है। वे परियोजना से जुड़ी गतिविधियों का विरोध करते हुए अपनी मांगें उठा रहे हैं।

अक्टूबर में परियोजना स्थल पर जमीन की शुरुआती जांच के लिए बोरिंग मशीनें पहुंचने के बाद विरोध तेज हो गया था। ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया था।ग्राम सभा में भी परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। ग्रामीणों ने कथित अनापत्ति प्रमाण पत्र की जांच कराने की मांग भी उठाई है।

ग्रामीणों को समझाने गांव पहुंचे थे नेता

न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध के बीच ग्रामीणों को समझाने के लिए इससे पहले मनगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति, कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी, एसडीएम और गढ़ थाना प्रभारी अवनीश मिश्रा सहित अन्य अधिकारी गांव पहुंच चुके हैं। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत के बावजूद परियोजना को लेकर विरोध जारी है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

विमला कोल की मौत के बाद सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने भी विरोध जताया है। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा- आखिर प्रशासन कितने लोगों की जान लेना चाहता है। उन्होंने इस मामले को लेकर नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों के विरोध के बीच महिला की मौत पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर प्लांट से न केवल किसानों के खेतों का नुकसान होगा बल्कि आने वाली पढ़ी भी कई भयानक बीमारी का शिकार होगी। सबसे बड़ा नुकसान होगा विस्थापन का। दूर तक कई गांवों की आबोहवा खराब होगी। प्रदूषण फैलेगा,लोगों का जीना मुश्किल हो जाएगा।

जमीन आवंटन पर प्रशासन ने कहा

परियोजना को लेकर पहले प्रशासन की ओर से कहा गया था कि टाटा पावर को परमाणु बिजलीघर के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई है। प्रारंभिक गतिविधियों के जरिए स्थल की उपयुक्तता और परियोजना की व्यवहार्यता जांचने की बात कही गई थी।विमला कोल की मौत के मामले में उनकी मृत्यु के सटीक चिकित्सकीय कारण और जल सत्याग्रह से मौत के सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इस मामले में प्रशासन का पक्ष और जांच से जुड़ी जानकारी सामने आना बाकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी