रीवा में कागजों पर बनी गौशाला, 20 लाख रुपये का भुगतान; ईओडब्ल्यू ने अधिकारियों और ठेकेदार पर दर्ज किया केस
रीवा, 16 अक्टूबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में मनरेगा के तहत गौशाला निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में नगर परिषद डभौरा में प्रस्तावित गौशाला के निर्माण में निविदा प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक गड़बड़ियां पाए जाने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार, करीब 37.85 लाख रुपये की लागत वाले इस कार्य में मौके पर गौशाला से जुड़ी अधिकांश संरचनाएं नहीं मिलीं, जबकि 20.22 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका था। ईओडब्ल्यू ने मामले में तत्कालीन अधिकारियों, संबंधित फर्म के संचालक और अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) संभाग क्रमांक-2 को डभौरा की यूनिट नंबर-3 में निराश्रित गोवंश की देखभाल के लिए गौशाला का निर्माण कराना था। करीब 37.85 लाख रुपये की इस परियोजना में गौशाला भवन, बछड़ा शेड, भूसा गोदाम, बीमार गायों के लिए शेड, नलकूप, 6009 लीटर क्षमता की पानी की टंकी, बाउंड्रीवॉल और जमीन का समतलीकरण सहित अन्य कार्य प्रस्तावित थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन अधिकारियों ने पारदर्शी खुली निविदा प्रक्रिया अपनाने के बजाय कथित तौर पर एक पसंदीदा फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। आरोप है कि छतरपुर की मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा के पक्ष में निविदा प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और फर्म को कार्यादेश जारी कर दिया गया।
दो तारीखों पर जारी हुईं कथित फर्जी निविदाएं
जांच में कार्यालयीन रिकॉर्ड के आधार पर 3 दिसंबर 2020 और 31 दिसंबर 2020 को जारी निविदाओं को कथित रूप से फर्जी और कूटरचित बताया गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, निविदा प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क और अमानत राशि जमा किए जाने के प्रमाण नहीं मिले।
जांच एजेंसी का कहना है कि कुल 28 प्रकार की सामग्री की आपूर्ति के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी, लेकिन संबंधित फर्म ने केवल आठ सामग्रियों का अधूरा दर पत्रक प्रस्तुत किया। इसके बावजूद तुलनात्मक पत्रक तैयार कर फर्म को एल-1 घोषित किया गया और उसे काम सौंप दिया गया।
मौके पर नहीं मिले कई निर्माण कार्य
ईओडब्ल्यू की जांच में निर्माण स्थल के भौतिक सत्यापन के दौरान केवल करीब 80 गुणा 25 फीट की अधूरी बाउंड्रीवॉल और एक अधूरा भवन मिला। जांच के अनुसार, वहां प्रस्तावित शेड, पानी की टंकी और नलकूप सहित अन्य प्रमुख निर्माण नहीं पाए गए।
एजेंसी के मुताबिक, मनरेगा पोर्टल पर कुल 27,38,578 रुपये के भुगतान के लिए प्रस्तुतियां की गई थीं। इनमें से 20,22,020 रुपये का भुगतान किया जा चुका था। जांच में आरोप लगाया गया कि वास्तविक निर्माण कार्य के अनुरूप काम किए बिना राशि का भुगतान कराया गया।
इन अधिकारियों और फर्म संचालक पर मामला दर्ज
ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को बताया कि जांच के बाद तत्कालीन अधिकारियों और संबंधित फर्म के संचालक सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
मामले में राजेंद्र सिंह धुर्वे, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग क्रमांक-1 एवं प्रभारी कार्यपालन यंत्री संभाग क्रमांक-2 रीवा; डीएसआर, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग क्रमांक-2; हिमांशु तिवारी, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग सीधी; जगदीश सिंह राजपूत, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी मऊगंज; लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला, तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 एवं प्रभारी निविदा शाखा, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग-2 रीवा; तथा मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा के संचालक दीनदयाल कुशवाहा को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7(सी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

