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रीवा9 सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग के मुआवजा को लेकर किसानों ने उपमुख्यमंत्री शुक्ल से लगाई गुहार

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रीवा9 सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग के मुआवजा को लेकर किसानों ने उपमुख्यमंत्री शुक्ल से लगाई गुहार


रीवा, 05 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में रीवा जिले के गुढ़ तहसील अंतर्गत विभिन्न गांवों के सैकड़ों किसान अपनी समस्याओं को लेकर रविवार को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के निवास पहुंचे, जहां उन्होंने मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई।

किसानों ने उपमुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि प्रशासन द्वारा भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा निर्धारण में भारी अनियमिताएं की गई है साथ ही उनका आरोप है कि वर्गफुट के आधार पर मूल्यांकन योग्य भूमि को हेक्टेयर के आधार पर जोड़कर मुआवजा तय कर दिया गया, जिससे उन्हें वास्तविक बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम राशि प्राप्त हो रही है।

ग्रामीणों का कहना था कि कई किसानों की अलग-अलग खसरा नंबरों की भूमि को एक साथ जोड़कर हेक्टेयर के रूप में मुआवजा तैयार कर दिया गया, जबकि प्रत्येक भूमि का स्वरूप, स्थान और बाजार मूल्य अलग-अलग है। किसानों ने इसे पूरी तरह नियमों के विपरीत बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने उपमुख्यमंत्री को यह भी बताया कि कई मामलों में एक खसरा नंबर की भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना में अधिग्रहित की गई है, जबकि उसी किसान की दूसरी भूमि काफी दूर स्थित है। इसके बावजूद दोनों भूमि को एक इकाई मानकर हेक्टेयर के आधार पर मुआवजा निर्धारित कर दिया गया। इससे वास्तविक बाजार दर के अनुरूप मुआवजा नहीं मिल पाया और किसानों के साथ अन्याय हुआ है।

ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों की मेहनत से अर्जित अपनी जमीन खो रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें न्यायसंगत मुआवजा भी नहीं मिल रहा। कई किसानों ने भावुक होकर कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो उनके पास सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए आर्थिक संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं।

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुआवजा निर्धारण की पूरी प्रक्रिया की नियमानुसार समीक्षा कराई जाएगी तथा शासन की गाइडलाइन के अनुरूप ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यदि कहीं त्रुटि या अनियमितता पाई जाती है तो उसका निराकरण कराया जाएगा और किसानों को हरसंभव न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद किसानों ने निष्पक्ष जांच और उचित मुआवजा निर्धारण की उम्मीद जताई। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना में मुआवजा निर्धारण को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब किसानों की निगाहें शासन और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी