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रीवा में डालमिया सीमेंट प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों और कर्मचारियों का आक्रोश, 17 दिन से धरना जारी

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रीवा में डालमिया सीमेंट प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों और कर्मचारियों का आक्रोश, 17 दिन से धरना जारी


रीवा, 31 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के नौवस्ता स्थित डालमिया सीमेंट प्लांट के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों और कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। रोजगार सहित विभिन्न मांगों को लेकर सैकड़ों ग्रामीण और प्लांट से निकाले गए कर्मचारी पिछले 17 दिनों से धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिन ग्रामीणों की जमीन पर सीमेंट प्लांट स्थापित हुआ, आज उन्हीं लोगों को रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को कहा कि ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन सौंपे और बातचीत भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों के मुताबिक, प्लांट के लिए जमीन लेते समय स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था। लेकिन अब रोजगार का मुद्दा ही विवाद की प्रमुख वजह बन गया है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि जेपी के समय से कई वर्षों तक काम करने वाले 200 से अधिक सुरक्षा गार्डों को डालमिया सीमेंट प्लांट के आने के बाद नौकरी से बाहर कर दिया गया। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें दोबारा काम पर रखा जाए और उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें रोजगार से वंचित होना पड़ा है।

ग्रामीणों ने प्लांट की खनन गतिविधियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित जमीन की लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद खनन कार्य जारी है। प्रदर्शनकारियों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

एक ओर नौकरी से निकाले गए कर्मचारी पुनर्बहाली की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ग्रामीण रोजगार, जमीन और अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। 17 दिनों से जारी धरने ने प्रशासन और प्लांट प्रबंधन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को अब तक ठोस समाधान नहीं मिलने से असंतोष बढ़ रहा है।

मामले में प्रमुख सवाल यह हैं कि नौकरी से निकाले गए 200 से अधिक सुरक्षा गार्डों की शिकायत पर अब तक जांच हुई है या नहीं? स्थानीय लोगों को रोजगार देने के संबंध में कोई लिखित समझौता अथवा शर्त तय की गई थी या नहीं? संबंधित खदान की लीज वर्तमान में वैध है या उसकी अवधि समाप्त हो चुकी है? यदि लीज अवधि समाप्त हो गई है, तो खनन किस अनुमति के आधार पर जारी है? इसके अलावा 17 दिनों से चल रहे धरने को लेकर प्रशासन और प्लांट प्रबंधन ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?

फिलहाल ग्रामीणों और कर्मचारियों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि उनकी मांगों पर निष्पक्ष जांच के साथ कोई समाधान निकलता है या धरना आगे भी जारी रहता है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी