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रीवा कलेक्टर की फटकार से नाराज मेडिकल टीचर एसोसिएशन, डॉक्टरों ने जताया विरोध

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रीवा कलेक्टर की फटकार से नाराज मेडिकल टीचर एसोसिएशन, डॉक्टरों ने जताया विरोध


रीवा, 08 सितंबर (हि.स.)। रीवा के संजय गांधी अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और गांधी स्मृति चिकित्सालय की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन की सख्ती के बीच मेडिकल टीचर एसोसिएशन और जिला प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए हैं। सोमवार देर रात कलेक्टर के नेतृत्व में अस्पतालों के निरीक्षण के दौरान प्रभारी डीन डॉ. मनोज इंदूरकर को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाए जाने से मेडिकल टीचर एसोसिएशन नाराज है। मंगलवार को एसोसिएशन ने गोपनीय बैठक कर इस पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की और कलेक्टर के व्यवहार के विरोध में लामबंद होने का निर्णय लिया।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर रीवा में पिछले कई दिनों से लगातार सवाल उठ रहे हैं। अस्पतालों में अव्यवस्था और मरीजों की मौत के मामलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में कांग्रेस ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वहीं कल्पना के पिता भी आमरण अनशन कर रहे हैं। इन परिस्थितियों के बीच अस्पताल प्रशासन पर दबाव बढ़ा है।

अस्पताल की व्यवस्थाओं की स्थिति जानने के लिए सोमवार देर रात कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक चले निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई तरह की अव्यवस्थाएं मिलीं। अस्पताल परिसर में गंदगी, मरीजों के साथ बड़ी संख्या में मौजूद अटेंडर, कमजोर सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य कमियां सामने आईं।

निरीक्षण के दौरान प्रभारी डीन डॉ. मनोज इंदूरकर भी मौजूद थे। एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों का कहना है कि डॉ. इंदूरकर ने उसी दिन प्रभारी डीन का पद संभाला था। इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान उन्हें सभी के सामने फटकार लगाई गई और व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। डॉ. इंदूरकर ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

घटना के बाद मेडिकल टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पुष्पेन्द्र शुक्ला ने मंगलवार को मेडिकल टीचरों की बैठक बुलाई। बैठक में कलेक्टर द्वारा प्रभारी डीन के साथ किए गए व्यवहार पर चर्चा हुई। चिकित्सकों ने इसे लेकर नाराजगी जताई और एकजुट होकर विरोध करने पर सहमति व्यक्त की।

एसोसिएशन के रुख के बाद प्रशासन और चिकित्सकों के बीच पहले से चल रही तनातनी और बढ़ने के संकेत हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए आईएएस अधिकारियों की तैनाती किए जाने का भी कुछ चिकित्सक लंबे समय से विरोध कर रहे थे। अब प्रशासन की ओर से अस्पताल की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए अधिकारियों को नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।

मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उसका विरोध केवल आईएएस अधिकारियों की अस्पताल में तैनाती तक सीमित नहीं रहेगा। एसोसिएशन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी से कथित तौर पर दूरी बनाने वाले चिकित्सकों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करेगा।

एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों का आरोप है कि कुछ डॉक्टर नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं आते और केवल उपस्थिति दर्ज कराने के बाद चले जाते हैं। ऐसे चिकित्सकों द्वारा निजी अस्पतालों में अधिक समय देने की बात भी सामने रखी गई है। आरोप है कि इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से नियमित रूप से ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों पर अतिरिक्त काम का दबाव पड़ता है।

एसोसिएशन ने ऐसे चिकित्सकों से दूरी बनाने और उनके खिलाफ भी आवाज उठाने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर प्रशासन और चिकित्सकों के बीच आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी