बारिश की कमी से बाणसागर में घटा जल भंडार, पिछले साल से पांच मीटर नीचे पहुंचा जलस्तर
रीवा, 17 जुलाई (हि.स.)।
विंध्य क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई एवं पेयजल परियोजना बाणसागर बांध में इस वर्ष अपेक्षित वर्षा नहीं होने का असर साफ दिखाई देने लगा है। पिछले वर्ष की तुलना में बांध का जलस्तर करीब पांच मीटर नीचे दर्ज किया गया है। लगातार कमजोर मानसून और सीमित जल आवक के कारण जलाशय का स्तर धीरे-धीरे घट रहा है, जिससे आगामी रबी सीजन की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जुलाई के दूसरे सप्ताह में बाणसागर का जलस्तर करीब 340 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि इस वर्ष यह घटकर 335.06 मीटर रह गया है। बांध का पूर्ण जलभराव स्तर (एफआरएल) 341.64 मीटर है, यानी वर्तमान जलस्तर अभी भी एफआरएल से 6.58 मीटर नीचे है।
बांध में इस समय कुल जल भंडारण क्षमता का लगभग 46.38 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है। अधिकारियों के अनुसार बारिश का सिलसिला थमने से जलाशय में आने वाले पानी की मात्रा कम बनी हुई है, जबकि निकासी अधिक होने के कारण जलस्तर में प्रतिदिन लगभग एक से डेढ़ सेंटीमीटर तक गिरावट दर्ज की जा रही है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले आठ महीनों में बांध में लगभग 2911.30 मिलियन घनमीटर पानी की कमी आई है। जहां पूर्ण जलभराव की स्थिति में जलाशय में 5429.61 मिलियन घनमीटर पानी रहता है, वहीं वर्तमान में यह घटकर 2518.31 मिलियन घनमीटर रह गया है।
जानकारों का कहना है कि इस बार बाणसागर के कैचमेंट क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जिसका सीधा असर जलभराव पर पड़ा है। हालांकि बांध में पानी की आवक जारी है, लेकिन निकासी उससे अधिक होने के कारण जलस्तर बढ़ने के बजाय लगातार घट रहा है।
वर्तमान में बाणसागर में लगभग 171.63 क्यूमेक्स पानी की आवक हो रही है, जबकि कुल 308.32 क्यूमेक्स पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा है। इसमें करीब 142 क्यूमेक्स पानी बिहार के हिस्से के लिए छोड़ा जा रहा है, जबकि लगभग 160 क्यूमेक्स पानी सीडब्ल्यूसी नहर के माध्यम से सिंचाई के लिए प्रवाहित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लगभग 5 क्यूमेक्स पानी वाष्पीकरण के कारण कम हो रहा है।
हालांकि बाणसागर परियोजना प्रबंधन का कहना है कि मानसून का मुख्य दौर अभी शेष है। यदि कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है तो जलाशय में तेजी से जलभराव हो सकता है और मौजूदा स्थिति में सुधार आने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल किसानों और सिंचाई से जुड़े क्षेत्रों की निगाहें आगामी वर्षा पर टिकी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

