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आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नपत्र से भड़का छात्रों का गुस्सा, बीए एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी परीक्षा निरस्त

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आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नपत्र से भड़का छात्रों का गुस्सा, बीए एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी परीक्षा निरस्त


जबलपुर, 17 सितंबर (हि.स.)। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में बीए एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी भाषा की परीक्षा का प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर आने के बाद छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया। प्रश्नपत्र देखकर परीक्षा देने पहुंचे विद्यार्थियों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा निरस्त करनी पड़ी। परीक्षा रद्द होने से छात्रों के शैक्षणिक सत्र और भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

मामले को लेकर गुरुवार को महाकौशल विधि छात्र संघ के नेतृत्व में सैकड़ों विधि छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और पेपर सेट करने वाली समिति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

महाकौशल विधि छात्र संघ के अध्यक्ष अंकुश चौधरी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के साथ-साथ उससे संबद्ध सभी विधि महाविद्यालयों में बीए एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी भाषा की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा केंद्रों पर जब छात्रों को प्रश्नपत्र वितरित किया गया तो उसमें पूछे गए प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के पाए गए। परीक्षा शुरू होने के बाद विद्यार्थियों ने प्रश्नपत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों का कहना है कि उन्होंने जिस पाठ्यक्रम के अनुसार पूरे वर्ष तैयारी की थी, परीक्षा में उससे अलग प्रश्न पूछे गए। इससे विद्यार्थियों के सामने परीक्षा देने को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया।

विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया। परीक्षा रद्द होने की जानकारी मिलते ही छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी में उन्होंने पूरे वर्ष मेहनत की थी और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा देने के लिए कई छात्र दूर-दराज के क्षेत्रों से जबलपुर पहुंचे थे।

महाकौशल विधि छात्र संघ अध्यक्ष अंकुश चौधरी ने कहा कि परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने में हुई कथित लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। उनके अनुसार ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए यात्रा, रहने और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ा। परीक्षा निरस्त होने के बाद उनका समय और पैसा दोनों प्रभावित हुए हैं।

छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए। प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति की भूमिका की भी जांच हो और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा निरस्त कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि दोबारा होने वाली परीक्षा में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

छात्रों की प्रमुख मांग है कि निरस्त की गई परीक्षा की नई तारीख जल्द घोषित की जाए। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा कार्यक्रम में देरी होने से आगामी परीक्षाओं और शैक्षणिक सत्र की पूरी समय-सारिणी प्रभावित हो सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को बिना अनावश्यक देरी किए पुनः परीक्षा की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि विद्यार्थी निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार तैयारी कर सकें। साथ ही, प्रश्नपत्र तैयार करने और जांचने की प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतने की मांग की गई है।

महाकौशल विधि छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। छात्रों ने कहा कि वे अपने शैक्षणिक हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में होने वाली किसी भी गलती का सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा आयोजन और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक