पन्ना : रपटा डूबने से कई गांवों का संपर्क टूटा, बच्ची की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
पन्ना, 19 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की देवेंद्रनगर तहसील में बड़वारा नदी पर बना वर्षों पुराना निम्नस्तरीय रपटा बारिश के पानी में डूब गया है। इसके चलते राजापुर, गुखौर, मड़ई, कल्पा, दौवनटोला, छोटी गुखौर, नई बस्ती चांदा और ककरहा सहित करीब 24 गांवों का देवेंद्रनगर से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मामूली बारिश में ही रपटा जलमग्न हो जाता है और हर वर्ष मानसून में हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित होता है।
ग्रामीणों के अनुसार, रपटा डूबने के कारण क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। लोगों को रोजमर्रा के काम, इलाज, शिक्षा और रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
बच्ची की मौत का आरोप, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान
राजापुर के सरपंच बेटूलाल चौधरी ने आरोप लगाया कि रपटा डूबने और दौवनटोला में पुलिया नहीं होने के कारण गांवों का देवेंद्रनगर से संपर्क टूट गया। इसी वजह से खिल्लू आदिवासी की बच्ची को समय पर उपचार के लिए अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और उसकी मौत हो गई।
सरपंच का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। बारिश के मौसम में संपर्क टूटने के कारण पहले भी ग्रामीणों को गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
करीब एक दशक से उठ रही स्थायी पुल की मांग
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब एक दशक पहले रपटा बनाए जाने के समय से ही इसकी ऊंचाई और मजबूती को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मानसून में रपटा डूबने की समस्या को लेकर ग्रामीण लगातार स्थायी पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि पिछले वर्ष भी प्रशासन को स्थिति से अवगत कराया गया था। उन्हें बताया गया था कि बारिश के दौरान रपटा डूब जाने से कई गांवों का संपर्क पूरी तरह खत्म हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं कराया गया।
स्कूल, रोजगार और खेती पर भी असर
रपटा डूबने से क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बारिश के दौरान बच्चों का स्कूल और कॉलेज जाना बंद हो जाता है। नौकरी और मजदूरी करने वाले लोग अपने कार्यस्थल तक नहीं पहुंच पाते। वहीं गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है।
महिलाओं को न्यायालय सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए बाहर निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करने वाले किसानों की परेशानी भी बढ़ जाती है, क्योंकि वे अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पाते।
ग्रामीणों का कहना है कि रपटा डूबने के बाद उनका संपर्क नागौद और देवेंद्रनगर दोनों ओर से प्रभावित हो जाता है। बीमारी, दुर्घटना, शिक्षा, रोजगार और व्यापार जैसी आवश्यक जरूरतों के लिए भी लोगों को कई बार घरों में रहने को मजबूर होना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि समस्या का अस्थायी इंतजाम करने के बजाय बड़वारा नदी पर जल्द से जल्द ऊंचे और मजबूत स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि हर साल बारिश के दौरान करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को इसी संकट से न गुजरना पड़े।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे

