home page

चंदेरी विधानसभा में सडक़ों के टेंडर न होने पर उठे सवाल: मंत्री बोले- योजना के तहत कोई कार्य स्वीकृत ही नहीं

 | 
चंदेरी विधानसभा में सडक़ों के टेंडर न होने पर उठे सवाल: मंत्री बोले- योजना के तहत कोई कार्य स्वीकृत ही नहीं


अशोकनगर, 25 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी विधानसभा क्षेत्र में सडक़ों के निर्माण और विकास कार्यों को लेकर क्षेत्रीय विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी द्वारा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के बाद नया प्रशासनिक व राजनीतिक मोड़ सामने आया है।

शनिवार को मिली जानकारी अनुसार विधायक ने प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत सडक़ों के निर्माण एवं लंबित टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा था।

विधायक ने टेंडर प्रक्रिया में देरी और लापरवाही पर घेरा:विधानसभा सत्र के दौरान चंदेरी विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने सरकार से जानकारी चाही थी कि अप्रैल 2023 से अब तक चंदेरी क्षेत्र में कितनी सडक़ों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है और ऐसी कितनी स्वीकृत सडक़ें हैं, जिनकी टेंडर प्रक्रिया दिनांक तक शुरू ही नहीं की गई?

विधायक ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि चंदेरी विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, इसके बावजूद योजना के तहत सडक़ों की टेंडर प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इस लापरवाही के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना प्राधिकृत निकाय में समय-समय पर पदस्थ रहे महाप्रबंधक जिम्मेदार हैं?

पंचायत मंत्री का जवाब: वर्तमान में कोई कार्य स्वीकृत नहींविधायक के सवाल का जवाब देते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्री द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार शून्य स्वीकृति रही। वर्ष 2023 से प्रश्न दिनांक तक चंदेरी विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना एवं मुख्यमंत्री मजरा टोला सडक़ योजना के तहत किसी भी नए निर्माण कार्य की स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।

चिन्हांकित बसाहटें के जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार क्षेत्र की 12 बसाहटों को चिन्हांकित किया गया है, जिनकी पात्रता और प्राथमिकता के आधार पर आगे स्वीकृति की कार्यवाही की जाएगी।

मजरा टोला योजना की स्थिति में मुख्यमंत्री मजरा टोला सडक़ योजना के तहत कुल 132 बसाहटों में से मापदंडों के अनुरूप 100 से अधिक आबादी वाली 71 संपर्कविहीन (बिना सडक़ वाली) बसाहटों को चिन्हित किया गया है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन चिन्हित बसाहटों को पात्रता व प्राथमिकता के आधार पर आगामी स्वीकृतियों में शामिल किया जाएगा, परंतु वर्तमान में कोई भी नया कार्य स्वीकृत नहीं है।

आदिवासी क्षेत्रों में सडक़ कनेक्टिविटी को लेकर बनी असमंजस की स्थितिसरकार के इस जवाब के बाद ग्रामीण व आदिवासी अंचलों में सडक़ों के निर्माण को लेकर संशय खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां स्थानीय जनप्रतिनिधि टेंडर प्रक्रिया में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासनिक जवाब से साफ है कि जब तक बजट व औपचारिक स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। अब देखना होगा कि चिन्हित बसाहटों को कब तक स्वीकृत कर टेंडर जारी किए जाते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार