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हरदा में महिला स्व-सहायता समूहों के नाम पर खरीदी संचालन पर सवाल, अनियमितताओं के आरोप तेज

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हरदा में महिला स्व-सहायता समूहों के नाम पर खरीदी संचालन पर सवाल, अनियमितताओं के आरोप तेज


हरदा, 11 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी को लेकर महिला स्व-सहायता समूहों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिन पांच महिला समूहों को खरीदी केंद्रों का संचालन सौंपा गया है, वहां वास्तविक संचालन पुरुषों और व्यापारियों द्वारा किया जा रहा है, जबकि समूह की महिला सदस्य केवल नाममात्र की भूमिका में हैं।

जानकारी के अनुसार राजनीतिक संरक्षण और सांठगांठ के जरिए समूहों का गठन कर खरीदी केंद्रों का संचालन हासिल किया गया। आरोप है कि समूहों में शामिल अधिकांश महिलाओं को खरीदी प्रक्रिया, लाभ या संचालन संबंधी जानकारी तक नहीं है। यदि समूह सदस्यों से सीधे चर्चा की जाए तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।

समर्थन मूल्य खरीदी और परिवहन व्यवस्था में भी बड़े स्तर पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि कई उपार्जन केंद्रों पर नियमों की अनदेखी कर खरीदी की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रहे।

सुल्तानपुर वेयरहाउस सहित अन्य खरीदी केंद्रों पर पीडीएस का गेहूं खरीदे जाने का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि गहाल सोसायटी द्वारा 60 से 70 क्विंटल गेहूं की सेटिंग कर खरीदी की गई थी। मामले का वीडियो भोपाल पहुंचने के बाद गेहूं वापस कर दिया गया, लेकिन किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती तो बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता था।

इसी तरह नाफेड की छापामार कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता डी.एस. चौहान का आरोप है कि मूंग खरीदी में मिट्टी और रेत की मिलावट का बड़ा स्टॉक मिलने के बावजूद जांच का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। उनका कहना है कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के चलते कार्रवाई को दबा दिया गया।

महिला स्व-सहायता समूहों के संचालन को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं कि शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर बाहरी लोग खरीदी केंद्र चला रहे हैं और नियमों की अनदेखी कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वहीं समूह की महिला सदस्यों की आर्थिक स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है और उन्हें वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा।

मामले को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग, मुख्यमंत्री, कमिश्नर और जिला कलेक्टर को शिकायत भेजी गई है। शिकायतकर्ताओं ने समर्थन मूल्य खरीदी और पीडीएस गेहूं मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इस संबंध में सहकारिता विभाग के पंजीयक एवं सहायक आयुक्त वासुदेव भदोरिया ने कहा कि खरीदी केंद्रों पर महिला समूह की अध्यक्ष, सचिव और सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य की जाएगी। साथ ही समय-समय पर वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला समूहों के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार/प्रमोद सोमानी

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा