जनता को त्वरित राहत और अधीनस्थों को बेहतर मार्गदर्शन देना प्रभावी पुलिस नेतृत्व की पहचान : डीजीपी मकवाणा
भोपाल, 17 सितंबर (हि.स.)। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा है कि प्रभावी पुलिस नेतृत्व की पहचान इस बात से होती है कि अधिकारी जनता की समस्याओं का कितनी तत्परता से समाधान कराते हैं और अपने अधीनस्थों को कितना बेहतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करते हैं। पुलिस अधिकारी समस्याओं को टालने के बजाय उनकी जड़ तक पहुंचकर उपलब्ध संसाधनों और नियमों के अनुरूप समाधान का प्रयास करें।
पुलिस मुख्यालय भोपाल में हाल ही में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 10 सहायक पुलिस अधीक्षकों (आईपीएस) ने गुरुवार को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। इस दौरान डीजीपी ने अधिकारियों से पुलिस नेतृत्व, पर्यवेक्षण और मैदानी कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से संवाद किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए अधिकारियों को पुलिस सेवा में प्रभावी नेतृत्व के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि एसडीओपी पुलिस व्यवस्था में पहला पर्यवेक्षण अधिकारी होता है। इसलिए पुलिसिंग को प्रभावी और संवेदनशील बनाने में उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। जनता की शिकायतों का समाधान पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। अधिकारी को चाहिए कि वह पीड़ित की समस्या को शुरुआती स्तर पर ही गंभीरता से समझे और उसके निराकरण की दिशा में तत्काल प्रयास करे, ताकि पीड़ित को समय पर राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि पुलिस नेतृत्व में ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ प्रभावी पर्यवेक्षण की बड़ी भूमिका है। अधिकारियों को अपने अधीनस्थों के कामकाज की नियमित समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही उनके सामने आने वाली समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
डीजीपी ने कहा कि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी केवल अधीनस्थ कर्मचारियों के काम की निगरानी करने तक सीमित नहीं होती। एक प्रभावी अधिकारी वही है, जो अपने अधीनस्थों का मार्गदर्शन करे, उनकी कठिनाइयों को समझे और आवश्यकता के अनुसार उन्हें सहयोग उपलब्ध कराए। ऐसा नेतृत्व पुलिस संगठन में विश्वास और बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करने में सहायक होता है।
उन्होंने अधिकारियों को समझाया कि मैदानी स्तर पर पुलिसिंग की वास्तविक चुनौतियों को समझना जरूरी है। इसके लिए थानों और पुलिस इकाइयों के नियमित निरीक्षण के साथ-साथ औचक निरीक्षण भी किए जाने चाहिए। इससे अधिकारियों को मैदानी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और कमियों को समय रहते दूर किया जा सकता है।
थानों के निरीक्षण को लेकर डीजीपी मकवाणा ने कहा कि निरीक्षण के दौरान पुलिस कार्यप्रणाली की छोटी-छोटी बारीकियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से निरुद्ध नहीं रखा जाए। इसके अलावा थानों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे चालू और कार्यशील स्थिति में रहें, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने अधिकारियों को नियमित एवं औचक निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके माध्यम से पुलिस व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने और आवश्यक सुधार की दिशा में कार्रवाई करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
डीजीपी ने कहा कि नए अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले नियमित निरीक्षणों में सक्रिय रूप से शामिल हों। निरीक्षण के दौरान पुलिसिंग की बारीकियों और व्यावहारिक पहलुओं को समझने का प्रयास करें। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और मैदानी अनुभव से पुलिसिंग की व्यावहारिक समझ विकसित होती है, जिसका लाभ अधिकारियों को आगे की सेवा में मिलता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में किताबी ज्ञान के साथ-साथ मैदानी अनुभव भी महत्वपूर्ण है। अलग-अलग परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता लगातार काम करने और अनुभवी अधिकारियों से सीखने से विकसित होती है।
पुलिस महानिदेशक ने तकनीक आधारित पुलिसिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपराधों और प्रकरणों के निराकरण में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। विशेष रूप से एनएएफआईएस (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) के माध्यम से उपलब्ध फिंगरप्रिंट संबंधी तकनीकी सहायता का उपयोग कर अपराधों के निराकरण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
डीजीपी मकवाणा ने थाना परेड को भी पुलिस कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि नियमित थाना परेड के माध्यम से पुलिस बल की उपस्थिति, अनुशासन, वर्दी, टर्नआउट और आवश्यक निर्देशों की जानकारी सुनिश्चित की जा सकती है। इसलिए थाना परेड को नियमित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाना चाहिए।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस सेवा में प्रतिदिन अलग-अलग प्रकृति की समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे में अधिकारी का दायित्व है कि वह समस्या को टालने या आगे बढ़ाने के बजाय उसके मूल कारण को समझे। उपलब्ध संसाधनों, कानून और नियमों के अनुरूप समाधान तलाशना अधिकारी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधीनस्थों की समस्याओं का समाधान करने वाला नेतृत्व ही संगठन के भीतर विश्वास का वातावरण तैयार करता है। जब अधीनस्थों को यह भरोसा होता है कि उनकी समस्याओं को सुना और समझा जाएगा, तो उनके कामकाज में भी सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है।
उन्होंने अधिकारियों को पुलिस सेवा के प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ काम करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी के व्यवहार और निर्णयों का सीधा प्रभाव जनता और पुलिस संगठन दोनों पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

