झाबुआ: जल संकट और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ किसानों का आंदोलन फिर शुरू
झाबुआ, 17 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में प्रधानमंत्री नल जल योजना और जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार के चलते गहराती जल समस्या तथा किसानों की विभिन्न कृषिगत परेशानियों को लेकर किसानों का आंदोलन एक बार फिर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने मंगलवार से पुनः धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संघ के प्रदेश प्रवक्ता प्रमजीत सिंह ने बताया कि इससे पहले पिछले मंगलवार को जिला कलेक्टर नेहा मीना के साथ हुई बैठक के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था। बैठक में प्रशासन ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने, फसल बीमा योजना में किसानों को लाभ दिलाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की जांच के लिए एक सप्ताह में समिति गठित करने का आश्वासन दिया था।
हालांकि, किसानों का आरोप है कि तय समयसीमा के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इसके चलते उन्हें मजबूर होकर दोबारा आंदोलन शुरू करना पड़ा। प्रमजीत सिंह ने कहा कि प्रशासन द्वारा बनाई गई जांच समिति निष्पक्ष नहीं है, क्योंकि इसमें उसी विभाग के उपयंत्रियों को शामिल किया गया है, जिन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे “आपत्तिजनक” बताते हुए कहा कि इस तरह की समिति किसानों को स्वीकार नहीं है।
किसान नेताओं की मांग है कि जांच समिति में कम से कम एसडीएम स्तर के अधिकारी को शामिल किया जाए, ताकि जांच पारदर्शी और निष्पक्ष हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिले के 483 गांवों में नल जल योजना के तहत पानी पहुंचाने के प्रशासनिक दावे पूरी तरह से गलत हैं। प्रमजीत सिंह के अनुसार, हकीकत यह है कि कुछ गांवों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक नल जल योजना का लाभ नहीं पहुंच पाया है। इससे ग्रामीणों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें और कृषि कार्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
किसानों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना के तहत भारी बजट आवंटित होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ है। उन्होंने विभाग के एसडीओ जीतेंद्र मावी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द से जल्द नल जल योजना के माध्यम से पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

