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मंदसौरः प्रधानमंत्री कॉलेज आफ एक्सीलेंस में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ शुभारंभ

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मंदसौरः प्रधानमंत्री कॉलेज आफ एक्सीलेंस में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ शुभारंभ


मन्दसौर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर स्थित स्थित प्रधानमंत्री कॉलेज आॅफ एक्सीलेंस, राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ।

सेमिनार में प्रथम दिवस की शुरूआत सम्माननीय अतिथि द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। शंखनाद के माध्यम से स्वस्तिवाचन उपरांत महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा संगीतमय सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई । कार्यक्रम की अगली कड़ी में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं वरिष्ठ प्राध्यापक द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया एवं प्राचार्य प्रो. जे. एस. दुबे द्वारा अतिथियों के बारे में जानकारी देकर सेमिनार की विषय के बारे जानकारी प्रदान की।

ए.बी.वी.पी. के पदाधिकारी सिरोही जी द्वारा विकसित भारत के लिए युवाओं को स्टार्टअप के बारे में जानकारी दी एवं युवाओं को अच्छी शिक्षा हेतु महाविद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा की।

अगली कड़ी में यू.एस.ए. से पधारे प्रोफेसर एलेक्स हेन्की द्वारा वैदिक संस्कृति एवं वसुधैव कुटुम्बकम् के बारे में भारत के दर्शन को रेखांकित करते हुए अपना उद्बोधन प्रस्तुत किया। पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को वैज्ञानिक व्यवस्था बताया।विकसित भारत के दर्शन को बताते हुए उन्होंने केंद्रीय बजट 2026 का भी उल्लेख किया। आपने भारत के अष्टांग योग के बारे में जानकारी देकर बताया कि योग के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर आनंदित महसूस करता है।

अगली कड़ी में दर्शनशास्र के विद्वान प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल द्वारा बताया कि विकसित भारत को भारत बोध के बिना नहीं समझा जा सकता। सेमिनार के विषय को रेखांकित करते हुए वेलफेयर स्टेट के स्थान पर भारत की विविधता के संदर्भ में समझना जरूरी हो जाती है। विकसित भारत को हिंद स्वराज्य के रूप में देखा जाना चाहिए। विकसित भारत 2047 को विश्व के अन्य राष्ट्रों के विकास के संदर्भ में नहीं समझा जा सकता । बल्कि मनुष्य के सर्व कल्याण के संदर्भ में ही समझा जा सकता है। अंत में शोध स्मारिका का उपस्थित अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।मंच संचालन डॉ. वीणा सिंह ने किया तथा आभार डॉ लालिता लोधा द्वारा माना गया। डॉ.धीरेंद्र राज तिवारी ने उत्पादन एवं उपभोक्ता के मॉडल पर बात की , सभ्यता कैसी होनी चाहिए, प्राणीयों में वासना हो, परिवार पर निर्भरता और लोग कैसे हो जीवन शैली समय एवं पर्यावरण संबंधित बात कहीं, मनुष्य के विचार कैसे हो वसुधैव कुटुम्बकम् से संबंधित बात की। सभी सत्रों में महाविद्यालय के स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओ को शांत किया । द्वितीय टेक्निकल सेशन का संचालन सीमा जैन ने किया एवं आभार डॉ. सचिन शर्मा ने माना।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया