भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी : राष्ट्रपति
जबलपुर, 21 जून (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है।
राष्ट्रपति मुर्मु रविवार को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थी। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न संकायों में एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को अपने करकमलों से स्वर्ण पदक प्रदान किया तथा उपाधियों का वितरण किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 141 विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही 182 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की। मंचीय कार्यक्रम के पूर्व महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर होना गर्व का विषय है। रानी दुर्गावती वीरता, साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं तथा नारीशक्ति के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगी। उन्होंने महान वीरांगना की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों को जनजातीय समाज, वंचित वर्गों तथा विशेषकर बेटियों के सशक्तिकरण के लिए आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जिस क्षेत्र में स्थित है, वहां जनजातीय और वनवासी संस्कृति की समृद्ध उपस्थिति है। ऐसे में यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं का दायित्व केवल अपने करियर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने समाज और गांवों तक पहुंचकर वहां के लोगों का मार्गदर्शन भी करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार जनजातीय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, लेकिन कई बार लोगों को इन योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया का पता नहीं होता। ऐसे में शिक्षित युवाओं, विशेषकर जनजातीय समाज से आगे बढ़े युवक-युवतियों का कर्तव्य है कि वे अपने समाज के बीच जाकर लोगों को मार्गदर्शन दें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति और पीछे छूटे समुदायों को भी विकास की मुख्यधारा में लाया जाएगा।
राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में समाहित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से पेटेंट प्राप्त करने जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है, जो महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी जिम्मेदारियां केवल परिवार या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य टिका है और उनके ज्ञान, ऊर्जा तथा संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के व्यापक कल्याण के लिए भी करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षित युवा अपने आसपास के वंचित, ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझें, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय से निकल रहे हैं, वे भविष्य में अधिकारी, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में उनका दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने अमर वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन जनजातीय अस्मिता, प्रजा कल्याण, नारी शक्ति, त्याग, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और आत्मगौरव का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की प्रत्येक बेटी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को और अधिक गौरवशाली बना दिया है। यह अवसर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का संस्थान नहीं है, बल्कि यह वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे अमर वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने साहस और अदम्य पराक्रम से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़कर अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया और मातृभूमि की स्वतंत्रता तथा सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार, राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, लखन घनघोरिया, संभागायुक्त धनंजय सिंह, कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

