अनूपपुर: 15 माह में बंद फुनगा हाईवे चौकी, 10 जवान वापस बुलाए
अनूपपुर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 पर सड़क हादसों के दौरान घायलों को तत्काल सहायता, यातायात नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू की गई यातायात हाईवे चौकी फुनगा महज 15 माह में ही बंद हो गई।
पुलिस मुख्यालय भोपाल के आदेश और राज्य शासन की मंजूरी के बाद फरवरी 2025 में शुरू की गई इस चौकी के लिए स्वीकृत 11 पुलिसकर्मियों में से 10 को 17 अगस्त 2026 के आदेश के बाद वापस यातायात थाना अनूपपुर बुला लिया गया। अब चौकी पर ताला लटका है।
शासन की मंजूरी के बाद शुरू हुई थी चौकी
तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मोतीउर्र रहमान के कार्यकाल में फरवरी 2025 में फुनगा हाईवे चौकी का शुभारंभ किया गया था। चौकी के लिए 11 पुलिसकर्मियों का बल स्वीकृत किया गया था। इसमें एक सूबेदार, दो सहायक उपनिरीक्षक, एक प्रधान आरक्षक, छह आरक्षक और एक चालक शामिल थे। उद्देश्य स्पष्ट था एनएच-43 पर दुर्घटनाओं की स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता पहुंचाना और हाईवे पर यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना। लेकिन अगस्त 2026 में जारी आदेश के बाद चौकी की पूरी व्यवस्था ही बदल गई। 11 में से 10 पुलिसकर्मियों को यातायात थाना अनूपपुर वापस बुला लिया गया। केवल एक कर्मचारी को चौकी पर छोड़ा गया। इसके बाद चौकी की व्यावहारिक उपयोगिता पर ही प्रश्न खड़े हो गए हैं।
यातायात थाना से जारी हुआ जवानों को वापस बुलाने का आदेश
17 अगस्त 2026 को जारी पत्र में यातायात व्यवस्था के सुचारू एवं प्रभावी संचालन तथा उपलब्ध बल की कमी का हवाला देते हुए हाईवे सुरक्षा चौकी में पदस्थ बल को यातायात थाना अनूपपुर में पदस्थ करने का आदेश दिया गया।
आदेश में एक सहायक उपनिरीक्षक को छोड़कर चौकी में पदस्थ समस्त बल को तत्काल प्रभाव से यातायात थाना बुलाने तथा थाना प्रभारी यातायात विनोद दुबे को हाईवे चौकी फुनगा का प्रबंधन, ड्यूटी व्यवस्था, देखरेख और आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही जिला मुख्यालय से देखने की जिम्मेदारी दिए जाने का उल्लेख है।
यहीं से प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या चौकी का पूरा बल हटाने का निर्णय पुलिस अधीक्षक कार्यालय की स्थापना शाखा के स्तर पर लिया गया था या यातायात थाना स्तर पर? यदि यातायात व्यवस्था के लिए बल की कमी थी तो क्या इसका आकलन करते समय हाईवे चौकी की सुरक्षा जरूरतों को भी शामिल किया गया?
25 के बल में भी 10 जवान कम पड़ गए!
जिला मुख्यालय में यातायात व्यवस्था के लिए करीब 10 प्वाइंट बनाए गए हैं। इनमें चार नो-एंट्री प्वाइंट शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यातायात थाने में वर्तमान में करीब 35 का बल है, जिसमें एक निरीक्षक, सात सहायक उपनिरीक्षक, सात प्रधान आरक्षक और 17 आरक्षक शामिल हैं। इनमें चार पुलिसकर्मियों को कागजों में अमरकंटक में लगाया गया बताया जा रहा है।
इसके बावजूद यातायात थाना प्रभारी को फुनगा हाईवे चौकी से 10 पुलिसकर्मियों को वापस बुलाने की जरूरत पड़ गई। सवाल यह है कि यदि जिला मुख्यालय में उपलब्ध बल के बावजूद कई यातायात प्वाइंटों पर नियमित तैनाती नहीं हो पा रही है, तो क्या समस्या बल की वास्तविक कमी है या उपलब्ध बल के प्रबंधन की?
बताया गया है कि यातायात थाना अनूपपुर से फुनगा हाईवे चौकी की दूरी तय करने में करीब 38 मिनट का समय लग सकता है। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया में देरी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि एक साथ कई दुर्घटनाएं हों, तो एक कर्मचारी के भरोसे चौकी किस तरह प्रभावी ढंग से काम करेगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
डीआईजी बोले- प्राथमिकता से होगी जांच
डीआईजी पीटीआरआई, पीएचक्यू भोपाल टी.के. विद्यार्थी ने मंगलवार को बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को प्राथमिकता से संज्ञान में लेकर जांच की जाएगी।
डीआईजी के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में फुनगा हाईवे चौकी से बल हटाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, आदेश जारी करने का अधिकार किसके पास था, चौकी बंद करने के बाद एनएच-43 की आपातकालीन पुलिस व्यवस्था के लिए क्या वैकल्पिक योजना बनाई गई और वापस बुलाए गए जवानों का वास्तविक उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
फिलहाल एनएच-43 पर दुर्घटना की स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता के लिए बनाई गई चौकी पर ताला लटका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—जब हाईवे पर हादसा होगा, तब मदद के लिए पुलिस कितनी जल्दी पहुंचेगी?
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

