राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में होता है व्यक्ति निर्माण : आलोक कुमार
उज्जैन, 12 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में व्यक्ति निर्माण होता है। ऐसा व्यक्ति जो देश-समाजहित में जीवन जिए। वह ऐसी भूल न करे, जो देश-समाज का अहित करे। निष्ठावान, हिंदू और देशप्रेमी रहे। आपत्ति में देश के साथ खड़ा रहे और खुशी में देश के साथ खुशी मनाए। ऐसे विचारवाले स्वयं सेवक देश को संगठित बनाते हैं। राष्ट को परम् वैभव तक पहुंचाते हैं।
यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहसरकार्यवाह आलोक कुमार ने रविवार की रात्रि मध्य प्रदेश के उज्जैन में लोकमान्य टिळक शिक्षा परिसर,नीलगंगा में आयोजित डॉ.हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला के तीसरे और समापन दिवस पर ''राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ-नए क्षितिज विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को रोटी-कपड़ा-मकान-शिक्षा-स्वास्थ्य-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता-ज्ञान विज्ञान-तकनीकी क्षेत्र में उन्नति-रक्षा क्षेत्र में ऐसा कि कोई आंख उठाकर न देख सके, ऐसे ही चीजों की जरूरत है। जब ये सभी जरूरतें पूरी हो जाएगी तो भारत परम् वैभव पर पहुंच जाएगा। जैसा समर्पण देश के लिए स्वयं सेवक में होता है,वैसा आमजन में भी हो,यह संघ चाहता है। यदि वे सभी बातें जो संघ समाज में देखना चाहता है,समाज में लाना चाहता है,वह यदि समाज अपना ले तो हम संगठन को बंद कर देंगे। संगठन वर्षो तक रहे,ऐसी कल्पना नहीं है। अब संगठन 101 वर्ष में चल रहा है। दो वर्ष पूर्व जब 99 वर्ष में चल रहा था,तब यह चर्चा हुई कि अब संघ को मोड़ लेना चाहिए। देशभर के प्रबुद्धजनों से चर्चा हुई। तय हुआ कि ऐसे विषय लिए जाएं जो 15-20 वर्ष तक समाज में फैलाने का काम करें। हम सामाजिक संगठन हैं। हमारे स्वयं सेवक राजनीति में भी है। पर राजनीति से ही परिवर्तन होगा,ऐसी सोच नहीं है। तब पांच बिंदुओं को चुना गया,जिनसे लोगों में परिवर्तन लाया जाए। यह हो गया तो हम अपनी आंखों से समृद्ध भारत को परम् वैभव पर देखेंगे।
सहसरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहा कि हम आक्रमणों और गुलामी के दौर से निकल गए। आज की स्थिति में विश्व के पांच सबसे मजबूत देशों में शामिल हो गए। ऐसा दिन भी आया था जब हमारे देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से एक समय उपवास करने को कहा ताकि अन्न बच सके। आज हम विश्व के 150 देशों को अन्न निर्यात करते हैं। तब हम 40 करोड़ थे,आज 150 करोड़ के करीब हैं। इस समय देश की समस्या भूख नहीं है। उन्होने एक उदाहरण दिया कि देश में एक स्थान पर चक्रवात आया और तबाही हुई। सेवा भारती के माध्यम से हमने बात की। हमें कहा गया कि पुराने वस्त्र मत भेजना, आजकल कोई पुराने वस्त्र नहीं लेता,भले ही सस्ते भेजना पर नए भेजना। हमने नए वस्त्र भेजे।
सहसरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहाकि संघ के 101 वर्ष में हम गृह संपर्क करेंगे। अभी तक 12 करोड़ लोगों से सम्पर्क हो चुका है। अब हम 10 हजार उन लोगों से मिलेंगे जिनमें सर्वोच्च/उच्च न्यायालय के वर्तमान और पूर्व जज होंगे। 30 हजार वर्तमान और पूर्व आयएएस/आयपीएस से मिलेंगे। सरकारी अधिकारियों, लेखकों, कलाकारों,समाजसेवी,उद्योगपतियों से मिलेंगे। हम म.प्र.के उन लोगों से भी मिले जो संघ के विरोधी हैं,अपशब्द कहते हैं। ऐसे लोग भी थे,जिन्होने कहाकि आप मिले हो,अच्छा लगा किंतु किसी से कहना मत। हमारी राजनीतिक हानि हो जाएगी। संघ ने आज तक किसी से कुछ नहीं मांगा। संघ स्वयं सेवकों के आधार पर चलता है।
उन्होंने कहा कि संघ को समझने के लिए चीन से एक प्रतिनिधि मण्डल आया। संघ वामपंथ को अच्छा नहीं मानता है,यह उन्हे पता था। उन्होने पूछा कि हम खराब क्यों हैं? आप बचे कैसे हैं? क्या आयडोलॉजी है? हमने कहाकि संघ के स्वयं सेवक और समाज उसकी शक्ति है। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता वरिष्ठ सनदी लेखाकार अजयकुमार जैन ने की। मंच पर डॉ.हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला समिति,उज्जैन के अध्यक्ष नितिन गरूड़ भी उपस्थित थे। केशव अर्चना संगीता लोदवाल ने प्रस्तुत की। व्यक्तिगत गीत देवेश पाण्डेय ने प्रस्तुत किया। अतिथि परिचय राजश्री जोशी ने दिया। अतिथि स्वागत राम शर्मा और मनु गोराहा ने किया। अतिथियों को स्मृति चिंह संजय वर्मा ने भेंट किए। संचालन दीपाली मीणा ने किया और आभार गोपाल गुप्ता ने माना।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

