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ऑपरेशन हमदर्द पुलिस का संवेदनशील चेहरा प्रस्तुत करने वाला प्रयोग : राजाबाबू सिंह

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ऑपरेशन हमदर्द पुलिस का संवेदनशील चेहरा प्रस्तुत करने वाला प्रयोग : राजाबाबू सिंह


भोपाल, 07 सितंबर (हि.स.)। विशेष पुलिस महानिदेशक, रेल, राजाबाबू सिंह ने कहा कि रेलवे स्टेशन अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थल हैं, जहां एक ओर हजारों यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए आते-जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई असहाय और जरूरतमंद लोग भी किसी न किसी कारण से स्टेशन परिसर में रह जाते हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराना रेल पुलिस की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से मध्य प्रदेश राजकीय रेल पुलिस का ‘ऑपरेशन हमदर्द’ प्रोएक्टिव पुलिसिंग का एक मानवीय प्रयोग है।

उन्होंने यह बात सोमवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में विद्यार्थियों के साथ ‘ऑपरेशन हमदर्द’ विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश जीआरपी ने प्रदेश के 548 रेलवे स्टेशनों पर ऐसे लोगों का डिजिटल डोजियर तैयार किया है, जिसमें उनकी पहचान और संबंधित जानकारियां दर्ज की गई हैं। इनमें घर से नाराज होकर आए लोग तथा विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों के कारण परिवार से अलग हुए लोग शामिल हैं। ऑपरेशन हमदर्द के माध्यम से ऐसे लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का प्रयास किया गया।

डिजिटल साक्ष्यों से परिजनों तक पहुंची पुलिस

राजाबाबू सिंह ने बताया कि कई बार रेलवे परिसरों में ऐसे लोग भी मिलते हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाती या जो बोलने अथवा समझने में सक्षम नहीं होते। ऐसी परिस्थितियों में पुलिस सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर घटनाक्रमों को जोड़ती है। इसके आधार पर व्यक्ति की पहचान और उसके परिजनों तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की अपनी कहानी होती है। ऑपरेशन हमदर्द के माध्यम से रेलवे परिसरों में मौजूद असहाय लोगों की परिस्थितियों को समझने और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की पहल की गई है। यह औपनिवेशिक दौर से चली आ रही पुलिस की कठोर छवि से अलग पुलिस के मानवीय स्वरूप को सामने लाने का भी प्रयास है।

पुलिस व्यवस्था में आए बदलावों पर चर्चा

विशेष पुलिस महानिदेशक ने विद्यार्थियों से संवाद के दौरान भारत की पुलिस व्यवस्था में उदारीकरण के दौर से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान समय तक आए बदलावों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग और बदलती कार्यप्रणाली के बारे में विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर दिए।

पत्रकारिता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय नागरिक पत्रकारिता का भी दौर है। पत्रकारिता न केवल घटनाओं को समाज तक पहुंचाती है, बल्कि विमर्श और जनमत निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में पत्रकारों की नैतिक जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में आने वाले युवाओं में उच्च नैतिक मूल्यों का होना आवश्यक है।

पुलिस के मानवीय स्वरूप को सामने लाता है नवाचार

विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि पुलिस के जनहितकारी और जनमित्र नवाचार पुलिस व्यवस्था का अलग स्वरूप समाज के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन हमदर्द’ पुलिसिंग की मानवीय छवि को समाज में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा