home page

सावन के दूसरे सोमवार शिवमय हुई उज्जैन नगरी, पालकी में चंद्रमोलेश्वर और हाथी पर मनमहेश ने दिए दर्शन

 | 
सावन के दूसरे सोमवार शिवमय हुई उज्जैन नगरी, पालकी में चंद्रमोलेश्वर और हाथी पर मनमहेश ने दिए दर्शन


उज्जैन, 10 अगस्त (हि.स.)। श्रावण माह के दूसरे सोमवार को बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन शिव भक्ति में डूबी रही। भगवान श्री महाकालेश्वर अपने भक्तों को दर्शन देने और प्रजा का कुशल-मंगल जानने पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर और हाथी पर श्री मनमहेश के स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले। सवारी के दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से अवंतिका नगरी गूंजती रही। संपूर्ण सवारी मार्ग पर लगभग 7.80 लाख श्रद्धालुओं ने भगवान के दोनों स्वरूपों के दर्शन किए।

सवारी से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने भगवान का पूजन-अर्चन कराया। सर्वप्रथम भगवान श्री महाकालेश्वर का षोडशोपचार पूजन किया गया और इसके बाद आरती हुई। इस अवसर पर संभागायुक्त आशीष सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, श्री महाकालेश्वर मंदिर के कलेक्टर एवं अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित अन्य अधिकारियों ने श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन किया और आरती में सम्मिलित हुए। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान का स्वागत किया।

मुख्य द्वार पर दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

पूजन-अर्चन के बाद भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। जैसे ही पालकी श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सवारी के आगे श्री महाकालेश्वर बैंड, लोक कला दल और जनजातीय लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हुए चल रहे थे।

सवारी मार्ग पर जगह-जगह खड़े श्रद्धालुओं ने भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर और हाथी पर विराजित श्री मनमहेश पर पुष्पवर्षा की। हजारों श्रद्धालु झांझ, मंजीरे, डमरू और ढोल बजाते हुए बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर सवारी के साथ चलते रहे। उज्जैन के बाहर से आए श्रद्धालु भी बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए आतुर नजर आए।

क्षिप्रा तट पर हुआ पूजन-अभिषेक

भगवान महाकाल की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां श्री चंद्रमोलेश्वर और श्री मनमहेश का मां क्षिप्रा के जल से अभिषेक एवं पूजन किया गया। रामघाट पर शंखनाद के बीच विधिवत पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई।

इसके बाद सवारी रामघाट से रामानुज कोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा और छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। यहां परंपरा के अनुसार सिंधिया स्टेट की ओर से गोपाल मंदिर के पुजारी ने पालकी में विराजित श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन किया। इसके बाद सवारी पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। मंदिर में आरती के बाद सवारी का विश्राम हुआ।

भगोरिया नृत्य ने मोहा मन

भगवान महाकाल की सवारी को भव्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए इस बार मध्य प्रदेश की आदिवासी लोक संस्कृति और परंपराओं को प्रमुखता दी गई। रामलीला आदिवासी नर्तक मंडली, छायन पश्चिम, पेटलावद, झाबुआ के कलाकारों ने भगोरिया लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी।

भील और भिलाला जनजातियों की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े भगोरिया नृत्य में कलाकारों ने रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-मांदल, थाली और बांसुरी की धुन पर प्रस्तुति दी। पाली, चक्रीपाली और पिरामिड जैसी समूह नृत्य संरचनाओं के माध्यम से कलाकारों ने आदिवासी जीवन, उल्लास और सामुदायिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।

50 नृत्यांगनाओं ने अर्पित की नृत्यांजलि

उज्जैन की प्रतिभा संगीत कला संस्थान और लोकायन संस्थान की करीब 50 नृत्यांगनाओं ने भी भगवान महाकाल की पालकी के समक्ष नृत्यांजलि अर्पित की। प्रतिभा रघुवंशी और प्रज्ञा गढ़वाल के मार्गदर्शन में कलाकारों ने भगवान भोलेनाथ की आराधना नृत्य के माध्यम से की। विशेष बात यह रही कि मंदिर के बैंड की धुन पर नृत्यांगनाओं ने प्रस्तुति दी।

रिमझिम बारिश के बीच एक ओर बाबा महाकाल का अभिषेक हो रहा था, वहीं नृत्यांगनाएं नृत्य के माध्यम से अपनी साधना अर्पित कर रही थीं। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

चलित एलईडी रथ से श्रद्धालुओं ने किए लाइव दर्शन

बाबा महाकाल की सवारी में शामिल नहीं हो पाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंध समिति की ओर से विशेष व्यवस्था की गई। सवारी के आगे और पीछे चलित एलईडी रथ लगाए गए, जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं को सवारी का सीधा प्रसारण दिखाया गया।

फ्रीगंज क्षेत्र, दत्त अखाड़ा क्षेत्र, श्री महाकालेश्वर त्रिवेणी द्वार सहित उज्जैन के प्रमुख मार्गों पर बड़ी एलईडी वाहनों के माध्यम से सवारी के लाइव दर्शन की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आयोजित अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2026 और श्री महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या 2026 का प्रसारण भी चलित एलईडी रथ के माध्यम से किया गया।

7.80 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

भगवान श्री महाकालेश्वर की दूसरी सवारी के दौरान संपूर्ण सवारी मार्ग पर लगभग 7.80 लाख श्रद्धालुओं ने श्री चंद्रमोलेश्वर और श्री मनमहेश स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन किए। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरा उज्जैन दिनभर शिव भक्ति में सराबोर रहा।

17 अगस्त को निकलेगी तीसरी सवारी

भगवान श्री महाकालेश्वर की तीसरी सवारी 17 अगस्त 2026, सोमवार को निकाली जाएगी। इसमें भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर के स्वरूप में पालकी में, श्री मनमहेश के स्वरूप में हाथी पर और शिव तांडव के स्वरूप में गरुड़ रथ पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल