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दीपावली पर आस्था और परंपरा से जगमगाते हैं शहडोल सहित अंचल के ऐतिहासिक लक्ष्मी मंदिर

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दीपावली पर आस्था और परंपरा से जगमगाते हैं शहडोल सहित अंचल के ऐतिहासिक लक्ष्मी मंदिर


शहडोल, 07 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति में सुख, समृद्धि, खुशहाली और आस्था का प्रतीक है। इस अवसर पर घर-आंगन से लेकर मंदिरों तक दीपों की रोशनी दिखाई देती है। मध्य प्रदेश के शहडोल की प्राचीन मंदिर दीपावली पर श्रद्धा और आस्था के प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। इन मंदिरों में सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार दीपदान, विशेष पूजन, अभिषेक, श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। कहीं श्रद्धालु पांच दीप प्रज्ज्वलित कर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं, तो कहीं सहस्र अर्चन, हवन और अन्नकूट महोत्सव के माध्यम से दीपोत्सव मनाया जाता है।

शहडोल जिले के ग्राम सिंदूरी स्थित डोंगरगढ़ पहाड़ी पर विराजमान मां महालक्ष्मी का प्राचीन मंदिर दीपावली पर विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर खोलाड़ रोड पर स्थित इस मंदिर में दीपदान की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु मां महालक्ष्मी की आराधना के लिए कम से कम पांच दीपक प्रज्ज्वलित करते हंध तथा मीठे प्रसाद का भोग लगाते हैं। मंदिर के पुजारी उमाशंकर तिवारी के अनुसार मां महालक्ष्मी की प्रतिमा का निर्माण कलचुरी काल में 10वीं शताब्दी में हुआ था। कमल के आसन पर विराजमान मां महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा भी स्थापित है। पुराणों में वर्णित मान्यताओं के आधार पर स्थानीय लोग इस स्थान को माता भुवनेश्वरी के रूप में भी पूजते हैं। यहां रूप चौदस से ही विशेष पूजन प्रारंभ हो जाता है और दीपावली पर मां की विशेष आराधना की जाती है।

सदियों पुरानी परंपराओं में जीवंत है आस्था और सांस्कृतिक विरासत

शहडोल सहित आसपास के जिलों के ऐतिहासिक मंदिरों में दीपावली का उत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को भी जीवंत बनाए रखता है। अलग-अलग मंदिरों में प्रचलित दीपदान, विशेष श्रृंगार, सहस्र अर्चन, हवन और अन्नकूट जैसी परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं। दीपावली पर इन प्राचीन मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक समय में भी लोगों की आस्था अपनी सदियों पुरानी परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला