नर्सिंग फर्जीवाड़ा - अपात्र कॉलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश
जबलपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आनंद पाठक एवं न्यायमूर्ति बी. पी. शर्मा की युगल पीठ ने राज्य के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन में हुए फर्जीवाडे से जुड़े मामलों पर लॉ स्टूडेटन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित सभी संबंधित मामलो की शुक्रवार को सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान अनुपयुक्त नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों के स्थानांतरण एवं प्रशिक्षण के संबंध में महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
न्यायालय के समक्ष मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के द्वारा अपात्र कॉलेजो के छात्रों के स्थानांतरण एवं डबल शिफ्ट प्रशिक्षण के संबंध में एक स्टेटस रिपोर्ट और शिफ्टिंग मॉड्यूल प्रस्तुत किया गया था । इसके जवाब में याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और याचिकाकर्ता विशाल बघेल के द्वारा आपत्ति दर्ज कराते हुए मॉड्यूल की व्यावहारिक कमियों, जैसे प्रशिक्षण की पारदर्शिता, छात्रों की पसंद, बुनियादी सुविधाओं, और प्रशिक्षण की लागत आदि मुद्दों को रेखांकित किया गया।
उनके द्वारा माँग की गई कि छात्रों की आगे की पढ़ाई का खर्चा अपात्र कॉलेजों की बैंक गारंटी राजसात कर वसूला जाना चाहिए तथा सम्पूर्ण शिफ्टिंग प्रक्रिया छात्रों की सुविधा को ध्यान में रख कर की जानी चाहिए । मामले की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, याचिकाकर्ता और काउंसिल दोनों पक्षों को निर्देशित किया गया है कि वे एक-दूसरे के प्रस्तावों एवं आपत्तियों को आपस में साझा करें और समन्वय बनाकर नया एवं संशोधित शिफ्टिंग मॉड्यूल तैयार कर अगली सुनवाई तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें ।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लिनिकल ट्रेनिंग से कोई समझौता न हो तथा दोषी संस्थाओं पर जवाबदेही तय की जा सके । मामले में नर्सिंग काउंसिल की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पैरवी की ।
मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

