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सागर जहरीली शराब कांड में पहुंची एनएचआरसी टीम, पीड़ितों के बयान दर्ज न होने पर पुलिस से नाराज

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सागर जहरीली शराब कांड में पहुंची एनएचआरसी टीम, पीड़ितों के बयान दर्ज न होने पर पुलिस से नाराज


सागर, 15 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम मंगलवार को सागर पहुंची।

आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में टीम ने जगतार और घुघर गांवों में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान कई परिजनों ने पुलिस पर अब तक उनके बयान दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया। पीड़ितों के बयान दर्ज नहीं होने की जानकारी मिलने पर आयोग की टीम ने नाराजगी जताई और पुलिस को तत्काल बयान दर्ज करने के निर्देश दिए।

सागर जिले की बंडा तहसील क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कई अन्य लोग बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। जहरीली शराब के सेवन से कुछ लोगों की आंखों की रोशनी चले जाने की बात भी सामने आई है। घटना के बाद से प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई जारी है।

गांवों में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिली टीम

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में मंगलवार को जगतार और घुघर गांवों का दौरा किया। टीम ने जहरीली शराब त्रासदी में जान गंवाने वाले और प्रभावित लोगों के परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान परिजनों ने घटना से जुड़ी अपनी परेशानियां और पुलिस कार्रवाई से संबंधित जानकारी आयोग के सामने रखी। परिवारों की ओर से टीम को बताया गया कि घटना को कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं। इस जानकारी पर आयोग सदस्य ने पुलिस अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

‘पुलिस की जिम्मेदारी बड़ी, सभी कानूनी प्रावधानों का पालन हो’

पत्रकारों से चर्चा के दौरान प्रियांक कानूनगो ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोग घायल हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि मामले में सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। कानूनगो ने बताया कि पीड़ित परिवारों से बातचीत के दौरान उन्हें यह जानकारी मिली कि कई लोगों के बयान अब तक दर्ज नहीं किए गए हैं। उन्होंने पुलिस को पीड़ितों और उनके परिजनों के बयान तत्काल दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मामले की जांच में किसी तरह की कमी न रहे।

शराब आपूर्तिकर्ताओं पर भी कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवारों ने आयोग के सामने यह आरोप भी लगाया कि स्थानीय शराब आपूर्तिकर्ताओं के बयान पुलिस ने नहीं लिए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की गई है। आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है। प्रियांक कानूनगो ने कहा कि पुलिस से जिले में शराब के सभी एजेंटों की सूची तैयार करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहरीली शराब की घटना में जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करना जरूरी है।

30 में से 19 आरोपित गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस की ओर से अब तक 30 आरोपियों में से 19 को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं मुख्य आरोपी मनीष लोधी उर्फ यशवंत राजपूत अभी भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार जुटी हुई है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम के दौरे के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर निगरानी और बढ़ने की संभावना है। आयोग ने पीड़ित परिवारों के बयान दर्ज करने के साथ-साथ जिले में अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर भी जोर दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा