नर्मदापुरम: सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 50 वर्षीय हथिनी की मौत, नर हाथी से भिड़ंत में हुई थी घायल
नर्मदापुरम, 10 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के चूरना क्षेत्र में हाथियों के बीच संघर्ष का मामला सामने आया है। नर हाथी कृष्णा से भिड़ंत में गंभीर रूप से घायल करीब 50 वर्षीय हथिनी स्मिता की सोमवार शाम मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि घटना के समय वन्यप्राणी चिकित्सक (वेटरिनियन) मौके पर मौजूद नहीं थे। सूचना मिलने के बाद चिकित्सक को बुलाया गया, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही शाम करीब 5 बजे हथिनी ने दम तोड़ दिया। हथिनी की मौत की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके के लिए रवाना हुए। डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम, एसडीओ और रेंजर ने घटनास्थल का जायजा लिया। विभाग अब घटना के कारणों और हाथियों की निगरानी एवं प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, नौ अगस्त की रात जंगल में हाथियों को छोड़े जाने के दौरान नर हाथी कृष्णा ने हथिनी स्मिता पर हमला कर दिया। सोमवार सुबह महावत जब हाथियों को वापस लेकर आए तो स्मिता के शरीर पर गहरा घाव दिखाई दिया। इसके बाद अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई। हथिनी की हालत गंभीर देखते हुए वन्यप्राणी चिकित्सक को सूचना दी गई। विभाग के मुताबिक, चिकित्सक उस समय शासकीय कार्य से बाहर थे। इस दौरान हथिनी को प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन शाम करीब 5 बजे उसकी हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।
कर्नाटक से करीब चार साल पहले लाया गया था कृष्णा
जानकारी के अनुसार, नर हाथी कृष्णा को करीब चार साल पहले कर्नाटक से चूरना लाया गया था। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, रात में हाथियों को जंगल में छोड़ा जाता है। इसी दौरान दोनों हाथियों के बीच संघर्ष हुआ। हथिनी स्मिता करीब 50 वर्ष की थी और प्रशिक्षित हाथियों में शामिल थी। घटना के बाद हाथियों को एक साथ रखने, उनकी निगरानी और घायल हथिनी को समय पर उपचार उपलब्ध कराने से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। वन विभाग का कहना है कि घटना की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
आठ हाथी बचे, पांच का ही काम में उपयोग
स्मिता की मौत के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या नौ से घटकर आठ रह गई है। इनमें से पांच हाथियों का नियमित रूप से काम में उपयोग किया जाता है। एक हथिनी अंजुगम की उम्र 75 वर्ष से अधिक होने के कारण उसे रिटायर किया जा चुका है, जबकि एक हाथी कम उम्र का होने के कारण अभी काम में नहीं लिया जाता।
डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम के अनुसार, स्मिता को घटना के बाद प्राथमिक उपचार दिया गया था। वन्यप्राणी चिकित्सक के पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। विभाग द्वारा मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

