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मोरपंख विवाद पर बोले जैन मुनि आदित्य सागर महाराज, कहा- जैन परंपरा पर लगाए गए आरोप निराधार

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मोरपंख विवाद पर बोले जैन मुनि आदित्य सागर महाराज, कहा- जैन परंपरा पर लगाए गए आरोप निराधार


नागदा, 24 जून (हि.स.)। एमबीए गोल्ड मेडलिस्ट की शिक्षा के बाद वैराग्य का मार्ग अपनाने वाले जैन मुनि आदित्य सागर महाराज ने दिगंबर जैन परंपरा में उपयोग होने वाली मोरपंख की पिच्छी को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में जीव हत्या का कोई स्थान नहीं है और मोरपंख के उपयोग को लेकर मोरों को नुकसान पहुंचाने की बात पूरी तरह बेबुनियाद है।

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में अल्प प्रवास पर आए जैन मुनि आदित्य सागर महाराज ने हिंदुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में कहा कि जैन समाज जीवों के संरक्षण और अहिंसा के सिद्धांतों को मानता है। उन्होंने कहा कि पिच्छी के लिए उपयोग किए जाने वाले मोरपंख प्राकृतिक रूप से प्राप्त होते हैं और इसके लिए किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाने की परंपरा नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप लगाने के बजाय पशु संरक्षण के अन्य गंभीर विषयों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने मेनका गांधी को सलाह देते हुए कहा कि अपनी ऊर्जा का उपयोग अन्य स्थानों पर भी किया जाना चाहिए।

सिंहस्थ को लेकर दिया संदेश

उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर जैन मुनि ने कहा कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में भीड़ प्रबंधन और जागरूकता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई धार्मिक आयोजनों में दिखावा बढ़ रहा है और साधना का भाव कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य आत्मिक विकास होना चाहिए, न कि केवल प्रदर्शन।

राजनीति और शिक्षा पर भी रखे विचार

वर्तमान राजनीति पर अपने विचार रखते हुए आदित्य सागर महाराज ने कहा कि राजनीति में धर्मनीति और नैतिकता का समावेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज राजनीति गलत दिशा में जा रही है और समाज को शिक्षा, संस्कार तथा चरित्र निर्माण पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ज्ञान और संस्कार की है। केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का विकास भी जरूरी है।

परिवारों में बढ़ती दूरी पर जताई चिंता

मुनि ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण परिवारों में संवाद कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि धन की दौड़ में लोग परिवार को समय नहीं दे पा रहे हैं। इसका समाधान परिवार के साथ समय बिताने, अच्छे साहित्य और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन से संभव है।

25 वर्ष की उम्र में अपनाया था वैराग्य

गौरतलब है कि आदित्य सागर महाराज ने जबलपुर से एमबीए में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद मात्र 25 वर्ष की उम्र में वैराग्य का मार्ग अपनाया था। वर्तमान में वे जीवन प्रबंधन, तनाव प्रबंधन और आध्यात्मिक विषयों पर देशभर में प्रवचन दे रहे हैं। बातचीत के दौरान जैन समाज के पंकज जैन भी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / कैलाश सनोलिया