एनएच-43 के अधूरे ओवरब्रिजों पर बड़ी कार्रवाई, तिरुपति बिल्डकॉन दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट श्रेणी में
उमरिया, 30 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर निर्माण कार्य में लगातार लापरवाही बरतने वाली तिरुपति बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (टीबीसीएल) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से अधूरे पड़े रेल ओवरब्रिजों के निर्माण में देरी और बार-बार चेतावनी के बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर कंपनी को दो वर्षों के लिए नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद कंपनी अगले दो वर्षों तक केंद्र और राज्य सरकार की किसी भी नई निर्माण परियोजना में भाग नहीं ले सकेगी। एमपीआरडीसी के इस फैसले को अधोसंरचना परियोजनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार एनएच-43 पर अमहा, पठारी, पाली और घुनघुटी के मोर्चा फाटक क्षेत्र में चार रेल ओवरब्रिजों के निर्माण की जिम्मेदारी टीबीसीएल को सौंपी गई थी, हालांकि निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी परियोजनाएं अधूरी हैं। निर्माण कार्य में देरी के कारण क्षेत्रीय यातायात प्रभावित हो रहा है और लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने कई बार परियोजना का निरीक्षण किया और कंपनी को नोटिस भी जारी किए, लेकिन कार्य की गति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं देखा गया। इसके बाद निगम ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मर सूची में शामिल करने का निर्णय लिया।
एमपीआरडीसी शहडोल के परियोजना प्रबंधक अवधेश स्वर्णकार ने हिस को बताया कि ओवरब्रिजों का निर्माण शीघ्र पूरा कराने के लिए मूल एजेंसी जीवीआर को भी पत्र भेजा गया है। उन्हें निर्माण कार्य में तेजी लाने और लंबित परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि परियोजना का मूल अनुबंध जीवीआर के पास था, लेकिन निर्माण कार्य टीबीसीएल को सौंप दिया गया था। वर्षों बाद भी परियोजना पूरी नहीं होने के कारण अब जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्ती बरती जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि नए निर्देशों के बाद निर्माण कार्य में तेजी आएगी और लंबे समय से लंबित ओवरब्रिज जल्द तैयार हो सकेंगे।
गौरतलब है कि टीबीसीएल देश की प्रमुख निर्माण कंपनियों में गिनी जाती रही है और उसने सड़क एवं पुल निर्माण के कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। इसके बावजूद उमरिया जिले की इस महत्वपूर्ण परियोजना में हुई देरी ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनएच-43 के अधूरे ओवरब्रिज आखिर कब तक पूरे हो पाते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी

