उज्जैनः केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने की ऊर्जा विभाग, स्वच्छ भारत मिशन और सिंहस्थ : 2028 की तैयारियों की समीक्षा
भोपाल, 19 जून (हि.स.)। केन्द्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने मध्य प्रदेश के प्रवास के दौरान शुक्रवार शाम को उज्जैन के कलेक्टर कार्यालय में ऊर्जा एवं स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा की। बैठक में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे।
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा के दौरान ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए जा चुके जल के पुनर्प्रबंधन तथा शौचालय निर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश की सभी 16 स्मार्ट सिटीज़ में स्वच्छता के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी आईईसी (सूचना, शिक्षा एवं संचार) मॉडल विकसित कर डिजिटल माध्यमों से जन-जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालयों की आवश्यकता का सर्वे कर वास्तविक मांग के अनुसार स्वीकृति प्रस्ताव भेजने तथा सामुदायिक शौचालयों की स्वच्छता एवं रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा।
मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हुए अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएं। विद्युत वितरण एवं परिचालन क्षेत्र की समीक्षा के दौरान उन्होंने रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम अंतर्गत शासकीय देयकों एवं सब्सिडी भुगतान को संबंधित वित्तीय वर्ष में ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में आगामी सिंहस्थ महापर्व : 2028 के अंतर्गत प्रक्रियाधीन विकास कार्यों की प्रगति और तैयारियों की समीक्षा की। उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पॉवर पॉईंट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से सिंहस्थ: 2028 के अंतर्गत प्रगतिरत योजनाओं और विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी।
बैठक में बताया गया कि इस बार के सिंहस्थ में लगभग 40 करोंड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सिंहस्थ अंतर्गत उज्जैन के अलावा अन्य जिलों में 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि के विकास कार्य किए जा रहे है। इन कार्यों में सड़कें, सेतु, नवीन घाट निर्माण और शहर के बुनियादी ढ़ाचें के विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण योजनाएं सम्मिलित है। इसके अलावा उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी के जल से स्नान हो सके इसके लिए सेवरखेडी-सिलारखेडी परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा 919 करोड़ रूपये की लागत से कान्ह-क्लोज डक्ट डायवर्सन परियोजना पर कार्य किया जा रहा है ताकि शिप्रा नदी में दूषित जल न मिल सके। इसके अलावा 778 करोड़ रुपए की लागत से 29 कि.मी. से अधिक नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है और 120 करोड रुपए की लागत से मौजूदा स्थायी घाटों का उन्नयन कार्य भी किया जा रहा है। इससे 04 करोड़ से अधिक श्रद्धालु 24 घंटे में स्नान कर सकेंगे। उज्जैन की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 1692 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन - इंदौर सिक्स लेन मार्ग, 2,935 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन - इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, 5,017 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-जावरा फोर लेन मार्ग, 2,523 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन - झालावाड फोर लेन मार्ग, 351 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन - मक्सी फोर लेन मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण कार्य भी किया जा रहा है।
कलेक्टर ने बताया कि सिंहस्थ : 2028 के अंतर्गत 22 से अधिक नए पुल, 05 रेल्वे ओवर ब्रिज, 17 नदी पुल का निर्माण भी किया जा रहा है। सिंहस्थ: 2028 के दौरान रियल टाईम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए केंद्रीयकृत डिजिटल कमांड प्लेटफार्म बनाया जाएगा। लगभग 3 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में कुल 30 पार्किंग सेक्टर बनाए जाएंगे।
बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजैारा ने जानकारी दी कि पार्किंग और होल्डिंग एरिया के लिए आस-पास के जिलों में भी व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन शहर जल आवर्धन योजना के अंतर्गत 1,133 करोंड रुपये की लागत से 200 एमएलडी जल शोधन संयंत्र, 700 से अधिक कि.मी. का पाईप लाईन नेटवर्क, 17 नए ओवरहेड टेंक, 49 हजार 087 नए पेयजल कनेक्शन किए जाएंगे।
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि इस बार का सिंहस्थ जीरो वेस्ट सिंहस्थ होगा। सिंहस्थ को हरित सिंहस्थ बनाने के लिए 20 मेगावॉट की सोलर संयंत्र क्षमता प्रस्तावित है जिससे 3.2 करोड़ युनिट का अनुमानित वार्षिक विद्युत उत्पादन किया जाएगा। ऊर्जा परियोजनाओं एवं विकास कार्यों के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही अधोसंरचना उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण के लिए उज्जैन में निर्माणाधीन 550 बेड के सर्वसुविधायुक्त मेडिकल कॉलेज भवन और संबंधित हॉस्टल सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई।
बताया गया कि 46 करोड़ रुपए की लागत से आईटी पार्क का निर्माण भी तेज गतिसे किया जा रहा है। उज्जैन विकास प्राधिकरण के द्वारा 3.2 हैक्टेयर क्षेत्र में 282 करोड़ रुपए की लागत से एकता मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसमें देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शोरुम और ‘’एक जिला-एक उत्पाद योजना अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की दुकाने लगाई जाएंगी।
बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ: 2028 में स्वच्छता बेहद आवश्यक है इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। शुद्ध पेयजल मिले, अपशिष्ट प्रबंधन भी अच्छे तरीके से किया जाए। सिंहस्थ: 2028 के दौरान कुछ विशेष व्यवस्थाओं के लिए उज्जैन के आस-पास के अन्य जिले और अन्य प्रदेशों से भी सहयोग प्राप्त किया जाए।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन भारत सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। नागरिकों में स्वच्छता के प्रति अधिक से अधिक जागरुकता लाई जाए, जिस प्रकार भोजन और पानी जरुरी है उस प्रकार सभी के जीवन में स्वच्छता भी उतनी ही जरुरी है।
राज्य सरकार नवकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास को दे रही है प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में ऊर्जा और रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम की समीक्षा भी की। बैठक में एसीएस नीरज मंडलोई ने पॉवर पाईंट प्रेजेन्टेशन से बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत प्रदेश में विद्युत वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण किया गया है। वर्ष 2020-21 में राज्य स्तर पर एटीएंडसी हानियां 41.55 प्रतिशत थी जो वर्ष 2025-26 में घट कर 25.68 प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार एसीएस-एआरआर अंतर 1.23 रुपए प्रति यूनिट से घटकर मात्र 0.10 रूपए प्रति यूनिट रह गया है।
स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में भी राज्य ने किया सराहनीय कार्य
केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में भी राज्य ने सराहनीय कार्य किया है। कुल लक्ष्य 134 लाख मीटरों के विरुद्ध 68 लाख मीटरों के अवार्ड जारी किए गए हैं। उपभोक्ताओं को इससे सीधा लाभ मिल रहा है। नेट मीटरिंग सुविधा भी पूरी तरह से स्मार्ट मीटर्स में समाहित कर ली गई है। ऊर्जा विभाग द्वारा आरडीएसएस योजना के माध्यम से ना केवल हानियों में कमी एवं राजस्व सुधार किया जा रहा है बल्कि उपभोक्ताओं को सटीक बीलिंग और बेहतर सेवा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे है।
बैठक में जानकारी दी गई कि आगामी सिंहस्थ : 2028 में उज्जैन शहर एवं मेला क्षेत्र की अनुमानित विद्युत मांग 490 मेगावाट (शहरी क्षेत्र 260 मेगावाट + मेला क्षेत्र 230 मेगावाट) आंकी गई है। मेला क्षेत्र में साधु-संत शिविरों, स्ट्रीट लाइट, सजावटी रोशनी, फव्वारे, जल प्रदाय, कचरा प्रबंधन एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए विस्तृत भार आंकलन किया गया है। इसके अनुरूप उज्जैन में त्रिवेणी विहार, हासामपुरा, वाल्मीकि धाम, दुधतलाई, चारधाम, नानाखेड़ा सहित कई नए 33/11 केवी एवं 132/33 केवी उपकेंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। कुल मिलाकर सिंहस्थ-2028 से संबंधित कार्यों के लिए विभिन्न योजनाओं (आरडीएसएस, विभागीय मद, एसएसटीडी आदि) के अंतर्गत लगभग 994 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मेला क्षेत्र में अस्थायी विद्युत व्यवस्था के लिए अतिरिक्त कार्य भी प्रस्तावित हैं।
बैठक में केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल ने निर्देश दिए कि पीएम सूर्य घर योजना में अधिक से अधिक कनेक्शन किए जाए। आमजन को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को लाभांवित किया जाए ताकि अन्नदाता ऊर्जा दाता भी बन सके। सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन ऊर्जा को भी बढ़ावा देने के लिये संयंत्र स्थापित किए जाए।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान लगभग 230 मेगावाट विद्युत ऊर्जा की खपत होने की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए नवीन विद्युत अधोसंरचना के विकास के लिये व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की केन्द्र सरकार के सहयोग से सिंहस्थ-2028 के लिए स्मार्ट विद्युत वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिये 387 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्तमान में प्रदेश की कुल विद्युत क्षमता में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है तथा इसकी क्षमता में और वृद्धि किए जाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पवन ऊर्जा (विंड एनर्जी) उत्पादन क्षमता के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। राज्य सरकार ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से नवकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास को प्राथमिकता दे रही है।
एमओयू पर हुए हस्ताक्षर
बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की उपस्थिति में आईआईएम इंदौर, शहरी विकास और आईआईएम नागपुर के मध्य एमओयू भी साईन किया गया। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के द्वारा जल संसाधन विभाग के अंतर्गत घाट निर्माण से संबंधित कार्यों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया।
बैठक में प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे, संभागायुक्त आशीषसिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, डीआईजी नवनीत भसीन, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थें।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

