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मप्रः उज्जैन में आज भारत-रूस के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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मप्रः उज्जैन में आज भारत-रूस के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन


- पहली बार दोनों देशों के विद्वानों के बीच होगा अनुवाद पर महामंथन

उज्जैन, 21 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय द्वारा भारत और रूस के बीच उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक आदान-प्रदान की श्रृंखला के तहत आज बुधवार को अनुवाद विमर्श: विज्ञान और व्यवहार का संश्लेषण विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि अंग्रेजी अध्ययनशाला एवं विदेशी भाषा विभाग और रूसी मानविकी विश्वविद्यालय मॉस्को के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार विश्वविद्यालय परिसर में यह आयोजन हो रहा है। इसमें रूस के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विद्वान और भारत के विशेषज्ञ एक साथ मंच पर विभिन्न विषयों पर विमर्श करेंगे।

उन्होंने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुभारंभ प्रातः 10.30 बजे होगा। इसमें रूस के तीन अत्यंत प्रतिष्ठित संस्थान अपनी सहभागिता कर रहे हैं, जिनमें रशियन विश्वविद्यालय मॉस्को,द पुश्किन इंस्टीट्यूट ऑफ रशियन लैंग्वेज और रशियन हाउस नई दिल्ली प्रमुख है।

इस संगोष्ठी की संयोजक प्रो. अंजना पांडे ने बताया कि यह कार्यशाला इस बात पर केंद्रित होगी कि अनुवाद केवल एक भाषा से दूसरी भाषा में शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक 'विज्ञान' है, जिसमें सटीकता की आवश्यकता होती है और एक 'व्यवहार' है जो दो संस्कृतियों को आपस में जोड़ता है।

उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन की रूपरेखा और प्रेरणा विश्वविद्यालय के कुलगुरु, संगोष्ठी के संरक्षक प्रो. अर्पण भारद्वाज है, जिनके अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की नीति के कारण ही सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय कैंपस में विदेशी संस्थानों के साथ इस स्तर का संवाद संभव हो सका है।

अंग्रेजी अध्ययनशाला के आचार्य प्रो. बीके आंजना ने कार्यशाला के मुख्य सत्रों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रथम सत्र अकादमिक रहेगा, इसमें 'अनुवाद के विज्ञान' पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसमें तकनीक और भाषा के तालमेल को समझाया जाएगा। द्वितीय सत्र व्यावहारिक रहेगा जिसमे रूसी और भारतीय विशेषज्ञों द्वारा अनुवाद के व्यावहारिक अनुप्रयोगों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला जाएगा। अंतिम सत्र संवाद सत्र रहेगा, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्र सीधे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से प्रश्न पूछ सकेंगे और रूस में शिक्षा की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

प्रो. आंजना ने बताया कि पूर्व में ऐसे आयोजन अक्सर बाहर या ऑनलाइन माध्यमों तक सीमित रहते थे, लेकिन पहली बार विश्वविद्यालय के भीतर भौतिक रूप से इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का आयोजन होने से कैंपस के वातावरण में एक नई ऊर्जा और वैश्विक सोच का संचार होगा। यह आयोजन 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020' के तहत अंतर्राष्ट्रीयकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शोधार्थी शामिल हो रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर