मप्र में बनेगा रियल-टाइम इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम, निर्माण स्थल पर घटना और मिनटों में कार्रवाई
भोपाल, 02 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र के फाइनेंस मॉडल से सीख लेकर मध्य प्रदेश में रियल-टाइम इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम बनाया जाएगा। इससे निर्माण स्थल घटना होगी तो मिनटों में कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग का 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 1 और 2 जून को महाराष्ट्र और गुजरात अध्ययन यात्रा पर गया।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र की मेगा सड़क परियोजनाओं, उनके वित्तीय मॉडल, सड़क विकास की दीर्घकालीन रणनीति और भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से तैयार की गई डिजिटल गवर्नेंस तथा रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणालियों विस्तार से चर्चा की। अध्ययन दौरे का उद्देश्य केवल अन्य राज्यों की परियोजनाओं को देखना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि सड़कों को आर्थिक विकास, निवेश, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और डिजिटल प्रबंधन से कैसे जोड़ा जाए।
मध्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास, पर्यटन, सड़क सुरक्षा और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लोक निर्माण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से यह अध्ययन यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है बताई जा रही है। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भारत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक सिबी चक्रवर्ती, विभाग के प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा एवं एसआर बघेल तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने मंगलवार को बताया कि कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश तेजी से विकसित हो रहा है। प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़क, पुल और भवन निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे समय में देश के अग्रणी राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें प्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना आवश्यक है।
पहला दिन : महाराष्ट्र में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का अध्ययन एवं मुख्यमंत्री फडणवीस से भेंट
प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सौजन्य भेंट की। बैठक में अधोसंरचना विकास, बड़े प्रोजेक्ट्स के वित्तीय प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि बड़ी परियोजनाओं की सफलता केवल धन उपलब्ध होने से नहीं होती, बल्कि उसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, इनोवेटिव फाइनेंस मौडलिंग, तेज निर्णय प्रक्रिया और लगातार निगरानी आवश्यक होती है।
बैठक में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले राज्य राजमार्गों और प्रमुख मार्गों के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) मिलकर सीमावर्ती मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार करेंगे। इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार, उद्योग, पर्यटन और परिवहन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद एमएसआरडीसी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक डॉ. अनिल कुमार गायकवाड़, संयुक्त प्रबंध संचालक राजेश पाटिल, लक्ष्मीनारायण मिश्रा तथा राजेश निघोट ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मुख्यालय में विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मेगा इन्फ्रस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और फाइनैन्सिंग मॉडेल्स की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र में लगभग 3.5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है, जिसका संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग तथा महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम मिलकर करते हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के महत्वपूर्ण मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर उन्हें कोर रोड नेटवर्क घोषित किया है। इन्हें वर्ष 2047 तक चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। एमएसआरडीसी ने बताया कि कोर रोड नेटवर्क को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है
ग्रोथ कॉरिडोर
ये ऐसे मार्ग हैं जो उद्योग, व्यापार, कृषि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इन मार्गों पर बेहतर सड़कें बनने से उद्योगों तक कच्चा माल जल्दी पहुंचता है, किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंचती है और नए निवेश आकर्षित होते हैं।
टूरिज्म कॉरिडोर
ये ऐसे मार्ग हैं जो प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ते हैं। अधिकारियों ने बताया कि अच्छी सड़कें केवल यात्रा को आसान नहीं बनातीं बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस मॉडल का विशेष अध्ययन किया क्योंकि मध्यप्रदेश में भी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की बड़ी संख्या है।
समृद्धि महामार्ग का वित्तीय मॉडल बना आकर्षण का केंद्र
बैठक में महाराष्ट्र की प्रमुख परियोजनाओं और उनके वित्तीय मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से समृद्धि महामार्ग के लिए अपनाई गई वित्तीय रणनीति ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार एसेट सिक्योरिटाइजेशन, वैकल्पिक वित्त पोषण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के माध्यम से बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त वित्तीय दबाव के पूरा किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी समझा कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए केवल बजटीय प्रावधानों पर निर्भर रहने के बजाय नए वित्तीय विकल्पों का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
अटल सेतु का अध्ययन
प्रतिनिधिमंडल अटल सेतु परियोजना के भ्रमण किया। समुद्र के ऊपर निर्मित यह पुल आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों ने परियोजना की निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, रखरखाव व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वित्तीय मॉडल की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने जाना कि इतनी बड़ी परियोजना में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय किस प्रकार स्थापित किया गया और समय-सीमा का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया।
मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक : इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण
अटल सेतु के बाद प्रतिनिधिमंडल मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की मिसिंग लिंक परियोजना के अध्ययन के लिए पहुंचा। यह परियोजना देश की सबसे जटिल सड़क परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि यहां निर्मित सुरंग विश्व की सबसे चौड़ी सुरंगों में शामिल है। इसके साथ भारत का सबसे ऊंचा केवल-स्टे (Cable Stayed) पुल भी इस परियोजना का भाग है। परियोजना की कुल लागत लगभग 6600 करोड़ रुपये है। सबसे रोचक तथ्य यह रहा कि इस परियोजना के वित्तपोषण के लिए महाराष्ट्र सरकार को अलग से वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ा। इसका पूरा वित्तीय प्रबंधन मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे से प्राप्त टोल राजस्व के आधार पर किया गया।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने इसे एक अनुकरणीय मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश की बड़ी परियोजनाओं के लिए भी ऐसे नवाचारी वित्तीय विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने बांद्रा-वर्ली सी लिंक का भी भ्रमण किया। यहां अधिकारियों ने परियोजना के संचालन, रखरखाव, परिसंपत्ति प्रबंधन और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से यह समझा कि निर्माण के बाद किसी परियोजना की गुणवत्ता और उपयोगिता को वर्षों तक बनाए रखने के लिए किस प्रकार की व्यवस्थाएं आवश्यक होती हैं।
दूसरा दिन : गुजरात में डिजिटल गवर्नेंस और तकनीकी नवाचारों का अध्ययन
प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान (बीआईएसएजी) पहुंचा। बैठक से पहले प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल से सौजन्य भेंट की और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर नवाचार और सुशासन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान विशेष रूप से दिसंबर-2024 में गुजरात अध्ययन यात्रा से प्राप्त अनुभवों के आधार पर पिछले डेढ़ वर्ष में विभाग द्वारा किए गए नवाचारों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मंत्री राकेश सिंह ने इस भेंट के दौरान गुजरात सरकार द्वारा प्रदान किए गए सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
भास्कराचार्य संस्थान के साथ हुई विस्तृत समीक्षा बैठक
मंत्री राकेश सिंह ने बीआईएसएजी के महानिदेशक टीपी सिंह और उनकी टीम के साथ मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के साथ चल रहे विभिन्न तकनीकी प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में लोक कल्याण सूचकांक की गणना के लिए विकसित मोबाइल एप्लीकेशन, ऑनलाइन पोर्टल, जीआईएस आधारित निर्णय प्रणाली और डेटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म की जानकारी दी गई।
लोक निर्माण मंत्री सिंह ने अध्ययन दौरे के समापन पर कहा कि यह यात्रा केवल परियोजनाओं को देखने की नहीं बल्कि नई सोच सीखने की यात्रा रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने यह सिखाया कि बड़े सपनों को मजबूत वित्तीय मॉडल और बेहतर प्रबंधन से कैसे पूरा किया जाता है, जबकि गुजरात ने दिखाया कि तकनीक का उपयोग कर शासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों राज्यों से मिले अनुभवों को मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा जिससे सड़कें केवल आवागमन का साधन न होकर आर्थिक विकास, पर्यटन, रोजगार और जनकल्याण की मजबूत आधारशिला बन सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग तकनीक, गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्य संस्कृति के क्षेत्र में देश के अग्रणी विभागों में शामिल होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

