मप्रः तकनीक और नवाचार से सशक्त हो रहा लोक निर्माण विभाग
भोपाल, 23 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” और GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के माध्यम से कार्य प्रणाली में नवाचार का नया अध्याय जोड़ा है।
विभाग ने यह महसूस किया कि सड़कों, पुलों और भवनों से संबंधित पूर्ण एवं प्रमाणिक डेटा के अभाव में योजनाओं का निर्माण अक्सर अनुमान के आधार पर करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह संकल्प लिया कि सुधार की शुरुआत प्रमाणिक डेटा से की जाएगी। “आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है” इस कहावत को चरितार्थ करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” का विकास किया गया, जिससे विभाग की परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक और डिजिटल सर्वे संभव हो सका।
जनसम्पर्क अधिकारी अरुण शर्मा ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि इस ऐप के माध्यम से प्रदेश में तीन दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया, जिसमें विभाग के अभियंता स्वयं मैदान में उतरकर अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों का विस्तृत सर्वेक्षण करने में जुटे। सर्वेक्षण के दौरान सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट का प्रकार, राइट ऑफ वे (ROW), शोल्डर तथा सड़क की वर्तमान स्थिति सहित विभिन्न तकनीकी मापदंडों का डिजिटल रूप से डेटा संकलित किया गया। इस व्यापक सर्वेक्षण के परिणामस्वरूप अब तक 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों, 2,975 शासकीय भवनों तथा 1,426 पुलों का डिजिटल सर्वेक्षण किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के दौरान नगरीय निकाय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा अन्य एजेंसियों की सड़कों के साथ लोक निर्माण विभाग की सड़कों की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से चिन्हित की गई हैं। इससे विभाग के पास अपनी प्रत्येक परिसंपत्ति का अद्यतन, डिजिटल और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो गया है, जिसके आधार पर अब निर्णय अनुमान के बजाय तथ्यात्मक आधार पर लिए जा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रमाणिक GIS आधारित डेटा उपलब्ध होने के बाद विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क प्लानिंग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पहले योजनाएं पारंपरिक पद्धति से कागजों पर तैयार की जाती थीं, किंतु अब पहली बार भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से विभाग के इंजीनियरों द्वारा प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए एक विशेष “मास्टर प्लान मॉड्यूल” विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। इस मॉड्यूल के जरिए यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि किन पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।इस महत्वाकांक्षी रोड नेटवर्क मास्टर प्लान का शुभारंभ 12 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री के करकमलों से किया गया, जो प्रदेश में सड़क विकास की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग की यह पहल केवल एक योजना नहीं बल्कि प्रदेश के अधोसंरचना विकास के लिए तकनीक आधारित दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। GIS, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से भविष्य में सड़क निर्माण और उन्नयन की योजनाएं अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी। यह पहल प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन और सुदृढ़ अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

