मप्र में 26 मई से शुरू होगा समर कैम्प 2026 : स्कूल की तैयारी
- पायलट प्रोजेक्ट में 4 जिलों के 6 हजार से अधिक केन्द्र शामिल. आँगनवाड़ी से स्कूल के सफर को आसान बनाएगी अनोखी पहल
भोपाल, 21 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा की नींव को मजबूत करने और बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए पूरी तरह तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार प्रमुख जिलों 'समर कैम्प 2026 : स्कूल की तैयारी कार्यक्रम की शुरुआत होने जा रही है।
जनसम्पर्क अधिकारी बिन्दु सुनील ने गुरुवार को बताया कि यह महत्वाकांक्षी अभियान बचपन की देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) के तहत संचालित 'आधारशिला पाठ्यक्रम' की अंतिम पुनरावृत्ति का एक अनूठा सामुदायिक विस्तार है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आँगनवाड़ी से निकलकर कक्षा-1 में प्रवेश करने वाला हर बच्चा पूरे आत्मविश्वास, भाषाई समझ और मानसिक तैयारी के साथ स्कूल की चौखट पर आय।
4 जिलों के 6,346 केंद्रों पर सजेगा शिक्षा का मंच
उन्होंने बताया कि यह ऐतिहासिक अभियान मई और जून 2026 के दौरान कुल 6 सप्ताह तक संचालित किया जाएगा। इसमें राज्य के चार चयनित जिलों-भोपाल, रायसेन, श्योपुर और टीकमगढ़ के लगभग 6,346 ऑगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) को शामिल किया गया है। कार्यक्रम के केंद्र में 5 से 6 वर्ष की आयु के वे बच्चे शामिल हैं जो इस सत्र में सीधे कक्षा-1 में जाने वाले हैं। अभियान में न केवल बच्चों को, बल्कि उनकी माताओं, केयर टेकर ऑगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और प्राथमिक स्कूलों के कक्षा 1 व 2 के शिक्षकों को भी एक साझा मंच पर लाया जायेगा।
तीन चरणों की अनूठी 'शिक्षा-यात्रा'
जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, यह समर कैम्प केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि 6 सप्ताह की एक बेहद सुगठित और व्यवस्थित यात्रा है, जिसे तीन प्रमुख चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में 26 मई 2026 को चारों जिलों के सभी चयनित आँगनवाड़ी और सामुदायिक केंद्रों पर एक साथ 'पहला स्कूल रेडीनेस मेला' आयोजित होगा। यहाँ पाँच विकास क्षेत्रों पर आधारित गतिविधि स्टॉल लगाए जाएंगे, जहाँ माताओं के सामने खेल-खेल में बच्चों की तैयारी जाँची जाएगी। इसके बाद हर बच्चे को एक 'रिपोर्ट कार्ड' दिया जाएगा, जिससे माँ पहली बार अपने बच्चे की वास्तविक सीखने की स्थिति को समझ पाएगी। इसी दिन माताओं को घर पर गतिविधियों कराने के लिए आइडिया विडियोज का परिचय भी दिया जाएगा।
दूसरे चरण में माताओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, जिसके तहत मई-जून के 4 हफ्तों तक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता माताओं के व्हाट्सअप ग्रुप पर प्रतिदिन आइडिया विडियोज भेजेंगी। माताएं घर पर ही बच्चों के साथ 'एक कहानी, एक खेल, एक कविता' मॉड्यूल के आधार पर गतिविधियों करेंगी। इसके साथ ही समय-समय पर माता-समूह की बैठकें होंगी और आँगनवाड़ी कार्यकर्ता खुद घर-घर जाकर बच्चों की प्रगति का जायजा लेंगी।
तीसरे और अंतिम चरण में 30 जून 2026 को 'दूसरा स्कूल रेडीनेस मेला' आयोजित होगा, जिसमें 4 हफ्तों की मेहनत के बाद बच्चों में आए सुधार और प्रगति का उत्सव मनाया जाएगा। बच्चों का दोबारा आंकलन होगा जिसमें माँ और समाज यह देख सकें कि बच्चा कितना आगे बढ़ा है। इस मेले का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक क्षण वह होगा, जब बच्चों का यह 'स्कूल रेडीनेस मेला रिपोर्ट कार्ड' प्राथमिक स्कूल के कक्षा-1 के शिक्षक को सौंप दिया जाएगा, जिससे शिक्षक पहले ही दिन से अपने नए छात्र की क्षमताओं और जरूरतों को समझ सके।
अभियान की समयबद्ध रूपरेखा और क्रियान्वयन
जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि प्रशासनिक से लेकर जमीनी स्तर तक इस पूरे कार्यक्रम को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए एक विस्तृत समय-सारणी तय की गई है। कार्यक्रम की शुरुआत 20 और 21 मई 2026 को सुपरवाइजर प्रशिक्षण से हुई। सेक्टर स्तर पर 22 और 23 मई 2026 को आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। जिसकी जिम्मेदारी सुपरवाइज़र और प्रथम की फील्ड टीम पर होगी।
26 मई 2026 को आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रथम और पार्टनर एनजीओ के सहयोग से 'स्कूल रेडीनेस मेला-1' का सफल आयोजन किया जाएगा। इस मेले के बाद मई और जून माह में पूरे 4 सप्ताह तक माताओं की सक्रिय सहभागिता का दौर चलेगा, जिसमें आँगनवाड़ी कार्यकर्ता आइडिया विडियोज और माता-समूह बैठकों के जरिए अभियान को घर-घर तक पहुँचाएँगी। इसके बाद, 30 जून 2026 को आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा दोबारा प्रथम और सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर 'स्कूल रेडीनेस मेला-2' आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों की अंतिम प्रगति देखी जाएगी।
चारों जिलों में अभियान की व्यापकता और लक्ष्य
इस ऐलिहासिक सामूहिक प्रयास की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के चार जिलों में हजारों केंद्रों को एक साथ इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम के तहत भोपाल जिले के लगभग 1,873 ऑगनवाडी केंद्रों और रायसेन जिले के करीब 1,860 केंद्रों पर इसे संचालित किया जाएगा। इसी तरह श्योपुर जिले के लगभग 1,320 आँगनवाड़ी केंद्रों और टीकमगढ़ जिले के करीब 1,293 केंद्रों को इस बड़े अभियान का हिस्सा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

