मप्र के स्कूलों में 8.66 लाख कम हुए विद्यार्थियों के नामांकन, जीतू पटवारी ने की सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग
भोपाल, 19 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन में पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में करीब 8.66 लाख की कमी दर्ज होने का मामला सामने आया है। इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चिंता जताते हुए राज्य सरकार से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने नामांकन में गिरावट के वास्तविक कारणों का पता लगाने और आंकड़ों का जिलेवार व स्कूलवार सत्यापन कराने की बात कही है।
जीतू पटवारी ने साेमवार काे मीडिया काे जारी अपने बयान में कहा कि, उपलब्ध आंकड़ों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रदेश के स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक कुल 1,42,31,833 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज था। वहीं, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 13 अक्टूबर तक यह संख्या घटकर 1,33,65,225 रह गई। इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच 8,66,608 विद्यार्थियों का अंतर है, जो करीब 6.1 प्रतिशत है।
भोपाल सहित कई जिलों में गिरावट का दावा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि राजधानी भोपाल के स्कूलों में भी 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन कम होने की बात सामने आई है। उन्होंने मऊगंज, अलीराजपुर, अशोकनगर, शिवपुरी और गुना सहित अन्य जिलों में भी नामांकन की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नामांकन में अंतर सामने आने पर इसके कारणों की पड़ताल जरूरी है। हालांकि, दोनों शैक्षणिक सत्रों के आंकड़ों की तुलना करते समय यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नामांकन की अंतिम तिथि, आंकड़ों के संकलन की स्थिति और रिकॉर्ड के सत्यापन में कोई अंतर तो नहीं है।
नामांकन में कमी के कारण स्पष्ट करने की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा बच्चों के भविष्य की बुनियाद है। इसलिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि नामांकन में कमी के पीछे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या, आर्थिक परिस्थितियां, अन्य शैक्षणिक कारण या आंकड़ों के संकलन से जुड़ी विसंगतियां जिम्मेदार हैं। पटवारी ने राज्य सरकार से उच्चस्तरीय जांच कराने, जिलेवार और स्कूलवार रिकॉर्ड का सत्यापन करने तथा नामांकन में अंतर के वास्तविक कारण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं, तो उनकी पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
जीतू पटवारी ने सरकार से इस विषय पर जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामले में केवल औपचारिक जवाब देने के बजाय वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। उनके मुताबिक, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

