सिंहस्थ: 2028 को प्रदेशवासी मिलकर बनाएंगे भव्य और दिव्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
- सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को पुण्य स्नान के लिये उपलब्ध करायेंगे स्वच्छ जलः मुख्यमंत्री
भोपाल, 19 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन के सिंहस्थ: 2028 को भव्य और दिव्य बनाने के लिये कोई कमी नहीं रखी जाएगी। प्रदेशवासियों के सहयोग से सिंहस्थ को ऐतिहासिक, अद्वितीय और अविस्मरणीय बनाया जायेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार शाम को उज्जैन में समीक्षा बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने इसके लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल को कान्ह क्लोज डक्ट डायवर्जन परियोजना तथा सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना की प्रगति से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में उज्जैन में सिंहस्थ और नगरीय विकास से संबंधित कार्यों की केन्द्रीय स्तर से पहली बार समीक्षा की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूर्ण हुए है। विकास के कार्य तेज गति से किए जा रहे है। मध्य प्रदेश भी कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में आगामी सिंहस्थ महापर्व : 2028 के अंतर्गत प्रक्रियाधीन विकास कार्यों की प्रगति और तैयारियों की समीक्षा की गई। उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने पॉवर पॉईंट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से सिंहस्थ: 2028 के अंतर्गत प्रगतिरत योजनाओं और विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी।
बैठक में बताया गया कि इस बार के सिंहस्थ में लगभग 40 करोंड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सिंहस्थ अंतर्गत उज्जैन के अलावा अन्य जिलों में 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि के विकास कार्य किए जा रहे है। इन कार्यों में सड़कें, सेतु, नवीन घाट निर्माण और शहर के बुनियादी ढ़ाचें के विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण योजनाएं सम्मिलित है। इसके अलावा उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी के जल से स्नान हो सके इसके लिए सेवरखेडी-सिलारखेडी परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा 919 करोड़ रूपये की लागत से कान्ह-क्लोज डक्ट डायवर्सन परियोजना पर कार्य किया जा रहा है ताकि शिप्रा नदी में दूषित जल न मिल सके। इसके अलावा 778 करोड़ रुपए की लागत से 29 कि.मी. से अधिक नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है और 120 करोड रुपए की लागत से मौजूदा स्थायी घाटों का उन्नयन कार्य भी किया जा रहा है। इससे 04 करोड़ से अधिक श्रद्धालु 24 घंटे में स्नान कर सकेंगे। अन्य निर्माण कार्यों की भी जानकारी दी गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

