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सीहोरः कुबेरेश्वरधाम पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन

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सीहोरः कुबेरेश्वरधाम पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन


सीहोरः कुबेरेश्वरधाम पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन


- सच्चा गुरु वही, जिसका जीवन समाज के लिए प्रेरणा बनेः पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर, 29 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुबेरेश्वरधाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का छह दिवसीय पर्व आस्था और उत्साह के साथ सफल रहा। बुधवार को कुबेरेश्वरधाम पर भक्ति का महाकुंभ नजर आया। एक मिलोमीटर लंबी कतारों में खड़े होकर श्रद्धालुओं ने गुरु दर्शन किए। वहीं इस संपूर्ण कार्यक्रम में करीब 10 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सच्चा गुरु वही है, जिसका जीवन, आचरण और व्यवहार समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने कहा कि ईश्वर से बड़ा हितैषी कोई नहीं है, इसलिए परमात्मा ही समस्त जगत के गुरु हैं।

उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को अपना गुरु स्वीकार किया था, जिससे गुरु परंपरा का महत्व स्पष्ट होता है। पंडित मिश्रा ने कहा कि यहां पर आने वाला हर भक्त सिर्फ शिव का है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर सुबह करीब 25 क्विंटल नुक्ति का भोग लगाकर विठलेश सेवा समिति के पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला आदि सेवादारों ने यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी का वितरण किया।

उन्होंने कहा कि बहुत ही सत्य और गहरी बात है। केवल अच्छे आचरण और ज्ञान वाले व्यक्ति को ही गुरु बनाना चाहिए, क्योंकि गलत व्यक्ति को गुरु बनाने से जीवन में असमंजस और परेशानियां आ सकती हैं। किसी के प्रभाव में आने से पहले उसके व्यवहार और जीवन को देखें। गलत मार्गदर्शन मिलने पर मन में भ्रम और भटकाव बढ़ता है। सच्चा गुरु वही है जिसका जीवन और आचरण समाज के लिए प्रेरणा हो।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में चार गुरु महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं माता, पिता, शिक्षक और सद्गुर। इन चारों के मार्गदर्शन से ही मनुष्य का जीवन संस्कारित, सफल और सार्थक बनता है।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने देवर्षि नारद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक बार नारद जी भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब भगवान विष्णु ने उनसे कहा कि उन्हें गुरु मंत्र ग्रहण करना चाहिए। इसके बाद नारद जी पृथ्वी पर आए और उन्हें सबसे पहले एक मछुआरा मिला। उसी से उन्होंने गुरु मंत्र प्राप्त किया। कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि ज्ञान और सद्गुरु का संदेश किसी भी माध्यम से मिल सकता है तथा सच्चा गुरु मनुष्य को 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्त होने का मार्ग दिखाता है।

विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि कुबेरेश्वरधाम में आयोजित छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव का समापन बुधवार को भक्ति, श्रद्धा और सेवा के अभूतपूर्व वातावरण के बीच हुआ। गुरु पूजन एवं गुरु दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक था कि गुरु पूजन के लिए लगभग एक किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं। पूरे परिसर में दिनभर हर-हर महादेव और जय गुरुदेव के जयघोष गूंजते रहे।

ऐतिहासिक महोत्सव का समापन व्यासपीठ से आभार

पंडित प्रदीप मिश्रा ने महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, पुलिस विभाग, चिकित्सा विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग, यातायात एवं ट्रैफिक पुलिस, रेल विभाग, निजी अस्पतालों की चिकित्सा टीम, विठलेश सेवा समिति के हजारों सेवादार तथा समाचार कवरेज करने वाले सभी पत्रकार बंधुओं का व्यासपीठ से विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के समन्वय, सेवा भाव और अनुशासित व्यवस्थाओं के कारण लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

रेल विभाग ने श्रद्धालुओं को दी बड़ी सौगात

महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेल विभाग ने सीहोर रेलवे स्टेशन पर 10 अतिरिक्त ट्रेनों का ठहराव उपलब्ध कराया। इससे देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में बड़ी सुविधा मिली। विशेष रूप से आगामी सावन माह और कांवड़ यात्रा को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए भी अतिरिक्त ट्रेनों के स्टापेज की व्यवस्था की है। छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव में लगभग 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कथा, गुरु पूजन, सत्संग एवं गुरु दीक्षा में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कुबेरेश्वरधाम में छह दिनों तक भक्ति, सेवा, अनुशासन और समर्पण का जो अद्भुत संगम देखने को मिला, उसने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर