home page

जबलपुर में आज निकलेगी संस्कार कांवड़ यात्रा, नर्मदा जल और पौधे के साथ कैलाश धाम पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु

 | 
जबलपुर में आज निकलेगी संस्कार कांवड़ यात्रा, नर्मदा जल और पौधे के साथ कैलाश धाम पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु


- कांवड़ यात्रा में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जबलपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में आज सावन महीने के दूसरे सोमवार को निकलने वाली प्रसिद्ध संस्कार कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर कैलाश धाम पहुंचेंगे। यात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुबह 10.45 बजे भोपाल से वायुयान द्वारा डुमना एयरपोर्ट जबलपुर आएंगे और यहां स्थानीय कार्यक्रम (संस्कार कांवड यात्रा) में शामिल होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12.30 बजे डुमना एयरपोर्ट से वायुयान द्वारा भोपाल प्रस्थान करेंगे।

जिला प्रशासन द्वारा जानकारी दी गई कि संस्कार कांवड यात्रा नर्मदा नदी के ग्वारीघाट से प्रारंभ होकर पनागर तहसील क्षेत्र के मटामर गांव की पहाड़ी पर स्थित कैलाश धाम मंदिर तक जाएगी। यात्रा की कुल दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। कैलाश धाम मंदिर मुख्य शहर से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सुंदर पहाड़ी पर बने इस मंदिर में प्राचीन और पवित्र श्वेत पिंडी (शिवलिंग) विराजमान है। सावन के महीने में यह क्षेत्र हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता से घिरा रहता है।

संस्कार कांवड़ यात्रा में एक लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं। यात्रा की विशेषता कांवड़ में एक तरफ नर्मदा जल और दूसरी तरफ एक पौधा लेकर चलने की अनूठी परंपरा है। श्रद्धालु भगवा वस्त्र पहनकर कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं।

यात्रा ग्वारीघाट से प्रारंभ होती है, जहां श्रद्धालु नर्मदा जल भरते हैं। इसके बाद यात्रा रामपुर, गोरखपुर, शास्त्री ब्रिज, मालवीय चौक, लार्डगंज, बड़ा फुहारा, सराफा चौक, खटीक मोहल्ला, बेलबाग, घमापुर चौक, कांचघर और राँझी होते हुए कैलाश धाम पहुंचती है। स्थानीय व्यवस्था के अनुसार यात्रा के मार्ग में बदलाव भी हो सकता है।

यात्रा के दौरान सामाजिक संगठनों द्वारा कांवड़ियों के लिए भोजन, फलाहार, पानी और चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था की जाती है। 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा मार्ग भक्तिमय हो जाता है। कैलाश धाम पहुंचकर श्रद्धालु मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। सावन के महीने में कैलाश धाम में बड़ी संख्या में भक्त कांवड़ यात्रा के साथ पहुंचते हैं।

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन संतों के मार्गदर्शन में कैलाशधाम का निर्माण 1984 में जन सहयोग से हुआ और 2011 से कावड़ यात्रा शुरू हुई, जिसे संस्कार कावड़ यात्रा के नाम से जानते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर