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प्रदेश के कई जिलों में दिख रहा सफाई कार्य ठप होने का असर, कर्मचारी हड़ताल पर

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प्रदेश के कई जिलों में दिख रहा सफाई कार्य ठप होने का असर, कर्मचारी हड़ताल पर


भोपाल, 05 नवंबर (हि.स.)। दिवाली से ठीक पहले मध्य प्रदेश की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। नियमित नौकरी, बेहतर वेतन और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर प्रदेशभर के दो लाख से अधिक सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसका सीधा असर शहरों की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ने लगा है। घरों से कचरा उठना बंद हो गया है और अधिकांश वार्डों में कचरे के ढेर लगने लगे हैं। त्योहार के ऐन मौके पर पैदा हुए इस संकट ने नगर निकायों की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि मांगें पूरी होने तक काम पर वापसी नहीं होगी।

राजधानी भोपाल में सफाई कर्मचारियों के बाद अब नगर निगम के करीब 11 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने भी गुरुवार से काम बंद कर दिया है। इसके साथ ही निगम का प्रशासनिक और मैदानी कामकाज लगभग ठप हो गया है। सफाई, जलप्रदाय, अग्निशमन, विद्युत, अतिक्रमण नियंत्रण, भवन अनुज्ञा, उद्यान और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से राजधानी की नागरिक सुविधाएं गंभीर संकट की ओर बढ़ रही हैं।

सबसे बड़ी चिंता शुक्रवार से पेयजल आपूर्ति बंद करने की चेतावनी है। ऐसा हुआ तो भोपाल के 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन प्रभावित हो सकते हैं। प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में भी कर्मचारियों की हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है। एक लाख से अधिक कर्मचारी नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं।

भोपाल में हड़ताल का दायरा अब सफाई व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। नगर निगम मुख्यालय से लेकर सभी 85 वार्डों और 21 जोन तक इसका असर पहुंच गया है। निगम मुख्यालय में कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पड़ी हैं, वहीं मैदानी अमले के काम बंद करने से शहर की व्यवस्थाएं प्रभावित हैं। सफाई कर्मचारियों के लगातार दूसरे दिन काम पर नहीं लौटने से सड़कों, बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में कचरे के ढेर लगने लगे हैं।

उल्लेखनीय है कि राजधानी में सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है। घरों से कचरा संग्रहण के लिए 400 से अधिक वाहन लगाए गए हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाते हैं। हड़ताल के कारण ये वाहन गार्बेज स्टेशनों पर खड़े हैं। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर एकत्र होने वाला कचरा कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित प्रसंस्करण स्थल तक पहुंचाया जाता है। संग्रहण और परिवहन की पूरी शृंखला प्रभावित होने से कचरा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा हो रहा है।

लिंक रोड नंबर-1, पांच नंबर स्टॉप, सात नंबर क्षेत्र, एमपी नगर एसडीएम कार्यालय के सामने, शिवाजी नगर और तुलसी नगर सहित कई इलाकों में कचरे के ढेर दिखाई देने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो दिनों से कचरा संग्रहण वाहन उनके क्षेत्रों में नहीं पहुंचे। डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़कों पर फैल रहा है। स्थिति यह है कि कुछ स्थानों पर लोग और व्यापारी स्वयं कचरा जलाकर उससे छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे हैं।

जलापूर्ति बंद हुई तो बढ़ेगी मुश्किल

सफाई व्यवस्था के बाद अब राजधानी के सामने पेयजल संकट का खतरा खड़ा हो गया है। हड़ताली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि शुक्रवार से जलप्रदाय सेवा भी बंद कर दी जाएगी। भोपाल में 2.30 लाख से अधिक घरेलू और अन्य नल कनेक्शन हैं। ऐसे में जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों का काम बंद करना लाखों नागरिकों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। इसके अतिरिक्त फायर विभाग, विद्युत, यांत्रिकी और अन्य आवश्यक सेवाओं के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हैं। इससे आपातकालीन सेवाओं के संचालन और नगर निगम की नियमित प्रशासनिक गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ गया है।

हड़ताल समाप्त कराने के लिए कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे से मुलाकात की, परंतु बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद कर्मचारियों ने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। इससे पहले मंगलवार को कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने के लिए प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि ज्ञापन लेने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद मुख्यमंत्री निवास के घेराव की योजना बनाई गई, जिसे पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर रोक दिया। कर्मचारी करीब दो घंटे तक सड़क पर बैठकर विरोध जताते रहे।

दूसरी ओर राजधानी के साथ प्रदेश के दूसरे शहरों में भी हड़ताल का असर दिखने लगा है। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी आंदोलन में शामिल हैं। यहां भी दीपावली के बाजारों और प्रमुख सड़कों पर कचरा जमा होने लगा है। त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने के कारण व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है। भोपाल के न्यू मार्केट सहित कई व्यापारिक क्षेत्रों में बुधवार को व्यापारियों ने स्वयंसेवकों की मदद से सफाई कराई। व्यापारियों ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की है।

इस बीच कुछ स्थानों पर नागरिकों ने स्वयं आगे आकर सफाई की जिम्मेदारी संभाली है। विदिशा जिले के सिरोंज में विधायक उमाकांत शर्मा बुधवार रात सड़क पर उतरे और करीब दो घंटे तक झाड़ू लगाकर सफाई की। राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में कपड़े सिलने की दुकान चलाने वाले दिनेश कुमार नामदेव उर्फ पप्पू ने गुरुवार सुबह अपनी दुकान छोड़कर बाजार की सफाई की। झाड़ू और हाथ ठेला लेकर वे सुभाष चौक से सर्राफा बाजार तक पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे तक कचरा समेटकर नगर से बाहर पहुंचाया। उनकी पहल से प्रभावित होकर कुछ अन्य लोग भी सफाई अभियान में शामिल हुए।

नियमितीकरण और 25 हजार न्यूनतम वेतन की मांग

प्रदेशव्यापी आंदोलन के पीछे कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगें हैं। कर्मचारी दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम मासिक वेतन 25 हजार रुपये निर्धारित करने और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पति या पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी उठाई जा रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से नगरीय निकायों की बुनियादी सेवाओं का संचालन करने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और सुरक्षा प्राप्त नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि आंदोलन का विस्तार अब प्रदेश की नगरीय व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। दीपावली जैसे बड़े त्योहार के समय सफाई, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाओं का प्रभावित होना सीधे आम नागरिकों, व्यापारियों और बाजारों को प्रभावित करेगा। एक ओर कर्मचारी अपनी मांगों पर सरकारी निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, दूसरी ओर शहरों में नागरिक सुविधाओं का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच शीघ्र समाधान निकालना जरूरी हो गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी