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सदानीरा समागमः मिराज मेलोडीज़ ने दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश, बच्चों ने दर्शकों को किया भावुक

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सदानीरा समागमः मिराज मेलोडीज़ ने दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश, बच्चों ने दर्शकों को किया भावुक


सदानीरा समागमः मिराज मेलोडीज़ ने दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश, बच्चों ने दर्शकों को किया भावुक


सदानीरा समागमः मिराज मेलोडीज़ ने दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश, बच्चों ने दर्शकों को किया भावुक


सदानीरा समागमः मिराज मेलोडीज़ ने दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश, बच्चों ने दर्शकों को किया भावुक


सदानीरा समागमः मिराज मेलोडीज़ ने दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश, बच्चों ने दर्शकों को किया भावुक


भोपाल, 30 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के भारत भवन में वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित सात दिवसीय सदानीरा समागम के चौथे दिन शनिवार की शाम मुंबई की रंगकर्मी इप्सिता चक्रवर्ती सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत बाल नाटक मिराज मेलोडीज़ ने दर्शकों का मन मोह लिया। लगभग 60 मिनट की इस द्विभाषी (हिंदी एवं अंग्रेज़ी) प्रस्तुति ने मनोरंजन के साथ-साथ जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावशाली संदेश दिया।

इसके पहले पूर्व रंग के मंच पर स्वाति उखले एवं साथी, उज्जैन द्वारा जल केन्द्रित लोक गीतों की प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा बहिरंग के मंच पर माधवी मुग्दल, नई दिल्ली के निर्देशन में नृत्य नाटिका जल प्रवाह का मंचन हुआ। इस अवसर पर वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी द्वारा विशेष रूप से तैयार सदानीरा समागम का मोमेंटा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर कलाकारों का स्वागत किया गया।

पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों को किया रेखांकित

मिराज मेलोडीज़ ने अपनी रोचक कथा और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से जल संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। नाटक की कहानी नील नामक एक जिज्ञासु बालक की है, जो एक रहस्यमयी स्वप्नलोक में पहुँच जाता है। इस दुनिया में पानी अत्यंत दुर्लभ है और लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए आंसुओं का सहारा लेते हैं। यहाँ उसकी मुलाकात ओनी नामक एक लड़की से होती है और दोनों मिलकर जल संकट से जूझ रही दुनिया को बचाने के लिए समाधान खोजने निकल पड़ते हैं। यात्रा के दौरान नील और ओनी अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं। इन अनुभवों के माध्यम से वे जल के महत्व, पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को समझते हैं।

नाटक प्रभावी ढंग से यह संदेश देता है कि पृथ्वी पर उपलब्ध जल संसाधन सीमित हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। साथ ही इसमें मित्रता, सहयोग, सहानुभूति और सामूहिक प्रयास जैसे मानवीय मूल्यों को भी रेखांकित किया गया।

नाटक में अर्पित शाश्वत, भास्कर शर्मा, चिराग खंडेलवाल, गुरिंदर कुमार और प्रतीक्षा कोटे ने प्रभावशाली अभिनय किया। नाटक का लेखन चिराग खंडेलवाल और साहिल आहूजा ने किया, जबकि निर्देशन इप्सिता चक्रवर्ती सिंह का रहा। संगीत संयोजन चिराग खंडेलवाल और इप्सिता चक्रवर्ती सिंह ने किया तथा प्रकाश व्यवस्था विक्रांत ठाकुर ने संभाली। मंच सामग्री की व्यवस्था धृति शर्मा और पोस्टर डिज़ाइन शिराज हुसैन द्वारा तैयार किया गया।

ओडिसी नृत्य नाटिका जल प्रवाह में प्रस्तुत हुआ जल और संस्कृति का अद्भुत संगम

प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना माधवी मुद्गल की शिष्याओं द्वारा प्रस्तुत ओडिसी नृत्य संकलन जल प्रवाह ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य, जल और सांस्कृतिक चेतना के अनूठे समन्वय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आध्यात्मिकता, सौंदर्य और परंपरा से सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। नृत्य नाटिका की शुरूआत गंगा स्तवन से हुई, जिसमें शिव की जटाओं से प्रवाहित पवित्र गंगा की महिमा का भावपूर्ण चित्रण किया गया।

नृत्यांगनाओं ने अपनी मुद्राओं और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से गंगा की निर्मलता एवं जीवनदायिनी स्वरूप को सजीव कर दिया। आगे वाद्य वैविध्य में ओडिशा की समृद्ध ताल-परंपरा और पारंपरिक वाद्यों की लयात्मकता को नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं ताओपोइ प्रस्तुति ने ओड़िशा की समुद्री व्यापार परंपरा और लोकजीवन को मंच पर जीवंत किया। लोककथा पर आधारित इस प्रस्तुति में ताओपोइ नामक बालिका के संघर्ष, आस्था और परिवार के पुनर्मिलन की मार्मिक कथा को ओडिसी शैली में प्रस्तुत किया।

अंतिम में स्फुरण में स्वर, लय और गति के सूक्ष्म सामंजस्य को नृत्य के माध्यम से साकार किया गया। कार्यक्रम में शलाखा राय, सुधा मुखोपाध्याय, शौभा बिष्ट, दीपिका बिष्ट सहित अन्य कलाकारों ने सहभागिता की। नृत्य संरचना माधवी मुद्गल, संगीत संरचना मधुप मुद्गल एवं महेंद्र राव तथा प्रकाश संयोजन बेटी जोशी द्वारा किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर