धार्मिक स्थल केवल दर्शन के नहीं, संस्कृति और जनभागीदारी के केंद्र बनें : प्रहलाद सिंह पटेल
- सदर मढ़िया प्रांगण में डोम शेड के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए मंत्री पटेल
भोपाल, 02 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें संस्कृति, अध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
मंत्री पटेल रविवार को नरसिंहपुर जिले में स्थित सदर मढ़िया प्रांगण में आयोजित डोम शेड के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उक्त डोम शेड की लागत पचास लाख रुपये है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्षा जल संरक्षण, वृक्षों का संरक्षण और धार्मिक परिसरों का सुनियोजित विकास वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिसरों में अनियोजित निर्माण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समिति की अनुमति और सुविचारित योजना के बिना कोई निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शौचालय, पार्किंग, ठहरने की व्यवस्था तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का समुचित विकास किया जाए। साथ ही धार्मिक स्थलों को योग, ध्यान, संगीत, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों के स्थायी केंद्र के रूप में विकसित करने पर बल दिया।
मंत्री पटेल ने कहा कि किसी भी संस्था की मजबूती उसके संसाधनों के बेहतर रखरखाव में निहित होती है। उपलब्ध उपकरणों और व्यवस्थाओं के नियमित मेंटेनेंस की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां संगीत, संस्कृति और शिक्षा का ऐसा वातावरण विकसित किया गया है, जिससे नई पीढ़ी को सीखने और अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल केवल दर्शन और पूजा तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि वहां का वातावरण समाज को अनुशासन, सेवा और संस्कार का संदेश देने वाला होना चाहिए। व्यवस्था केवल पुलिस के भरोसे नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों और समाज की सक्रिय भागीदारी से संचालित होनी चाहिए। उन्होंने गोटेगांव में पिछले 44 सालों से आयोजित किए जा रहे टूर्नामेंट का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां आत्मानुशासन और संस्कार होते हैं, वहां कानून-व्यवस्था की आवश्यकता स्वतः कम हो जाती है।
मंत्री पटेल ने धार्मिक परिसरों में स्थायी अधोसंरचना विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि बाउंड्री वॉल, डोम शेड, मंच तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का योजनाबद्ध निर्माण किया जाए, ताकि हर आयोजन में अस्थायी व्यवस्थाओं पर होने वाला अनावश्यक खर्च कम हो और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास इस प्रकार किया जाए कि वहां प्रकृति, संस्कृति, अध्यात्म और जनभागीदारी का सुंदर समन्वय स्थापित हो तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी वातावरण निर्मित हो।
कार्यक्रम में पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि सदर मढ़िया आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। डोम शेड के निर्माण से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और धार्मिक आयोजनों का संचालन अधिक व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। उन्होंने सभी से धार्मिक स्थलों के विकास, स्वच्छता और संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी रामसनेही पाठक ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने सामाजिक समरसता, जनसहभागिता और सामूहिक प्रयासों को ऐसे केंद्रों के विकास का आधार बताते हुए कहा कि समाज के सहयोग से ही धार्मिक स्थल संस्कार निर्माण और जनकल्याण के प्रभावी केंद्र बन सकते हैं। कार्यक्रम में महंत प्रीतम पुरी गोस्वामी, राधेश्याम नेमा, सुनील कोठारी, निशा सोनी सहित अन्य स्थानीय, सामूहिक जवारा समिति के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणादायी पहल : मंत्री पटेल
रोटरी क्लब ऑफ नरसिंहपुर सिटी के तत्वाधान में आयोजित “यादों की छाँव” वृहद वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत रविवार को श्याम सुंदर नारायण मुशरान पार्क में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनका संरक्षण और संवर्धन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण करना नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव विकसित करना है।
मंत्री पटेल ने कहा कि शासन की प्राथमिकता हमेशा यह रही है कि लगाए गए पौधे सुरक्षित रहें और सूखने न पाएं। वृक्षारोपण तभी सार्थक माना जाएगा, जब लगाए गए पौधे बड़े वृक्ष बनकर आने वाली पीढ़ियों को छाया, स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर जीवन प्रदान करें। उन्होंने रोटरी क्लब की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने केवल पौधे लगाने तक अपने दायित्व को सीमित नहीं रखा, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण का उत्तरदायित्व भी पूरी निष्ठा से निभाया है। यह समाज के लिए अनुकरणीय पहल है।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि जनसेवा से बड़ा कोई कार्य नहीं है। उन्होंने रोटरी क्लब द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज की भागीदारी से ऐसे अभियान व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण करते हैं। यादों की छाँव अभियान के माध्यम से पूर्वजों और प्रियजनों की स्मृति में पौधे लगाने का यह प्रयास अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायी है। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियां भी अपने पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़ी रहेंगी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वर्गीय श्याम सुंदर नारायण मुशरान के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात अतिथियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / भागीरथ तिवारी
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

