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रानी दुर्गावती जनजातीय समुदाय सहित देश की प्रत्येक बेटी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्रः राज्यपाल

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रानी दुर्गावती जनजातीय समुदाय सहित देश की प्रत्येक बेटी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्रः राज्यपाल


रानी दुर्गावती जनजातीय समुदाय सहित देश की प्रत्येक बेटी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्रः राज्यपाल


जबलपुर, 21 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन जनजातीय अस्मिता, प्रजा कल्याण, नारी शक्ति, त्याग, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और आत्मगौरव का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की प्रत्येक बेटी और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र हैं।

राज्यपाल पटेल रविवार को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि उनकी डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण, नवाचार और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने वाली शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रानी दुर्गावती सहित देश के महान जननायकों के शौर्य, लोककल्याण और संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।

उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय से 5-5 पिछड़े ग्रामों को गोद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थी स्वयं इन ग्रामों में जाकर वहाँ की परिस्थितियों को समझें और अनुभव करें कि जनजातीय समाज और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए किन-किन क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों में समाज सेवा की भावना, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का विकास होगा।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने पीएम जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र और तहसीलों का ऐसा विकास मानचित्र तैयार करने में सहयोग करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जनजातीय विकास एवं बुनियादी सुविधाओं से संबंधित कौन-कौन से कार्य अभी शेष हैं। इससे प्रत्येक गरीब और जरूरतमंद जनजातीय परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकेगा।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कार दिए, उनका पालन-पोषण किया और विश्वविद्यालय ने उन्हें शिक्षा एवं आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपनी जड़ों और समाज को कभी न भूलें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों के जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है, तब समय की मांग है कि वे महारानी रानी दुर्गावती से मिली प्रेरणा को अपने जीवन में आत्मसात करें और लोकतांत्रिक मूल्यों, नारी सशक्तिकरण तथा विकसित भारत के संकल्प को अपना जीवन ध्येय बनाकर राष्ट्र की उन्नति में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में प्राप्त करेगा नई ऊंचाइयां: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को और अधिक गौरवशाली बना दिया है। यह अवसर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का संस्थान नहीं है। यह वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे अमर वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने साहस और अदम्य पराक्रम से स्थापित किया।

उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़कर अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया और मातृभूमि की स्वतंत्रता तथा सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक विद्यार्थियों द्वारा एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करना प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सफलता न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की सकल नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होकर 28.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट दर को शून्य के करीब लाने के प्रयास सफल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने तीन नए शासकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, तकनीकी एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने से प्रदेश में किसान कल्यारण वर्ष अंतर्गत कृषि एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ ही नवाचार आधारित अध्ययन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे युवा आधुनिक तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट कर राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। स्वागत भाषण में कुलगुरु ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने पहली बार एनएएसी से ए प्लस ग्रेड प्राप्त किया है, जो संस्थान के लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर