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गांवों और शहरों में वित्तीय संसाधनों के व्यावहारिक बंटवारे के लिए बनाई जा रही है नीतियाँ: पवैया

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गांवों और शहरों में वित्तीय संसाधनों के व्यावहारिक बंटवारे के लिए बनाई जा रही है नीतियाँ: पवैया


- सभी कलेक्टर्स ने वित्तीय प्रबंधन के लिए दिये आवश्यक सुझाव

भोपाल, 24 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में बुधवार को भोपाल संभाग की बैठक संभागायुक्त कार्यालय में हुई। बैठक में पवैया ने कहा कि गांवों और शहरी निकायों में वित्तीय संसाधनों के बेहतर बंटवारे के लिए व्यवहारिक नीतियां बनाई जा रही है। इसी दिशा में आयोग द्वारा जनप्रतिनिधियों और कलेक्टरों की यह बैठक की है। सभी मिलकर गांवों की दशा सुधारें और संवारें।

बैठक में संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा एवं भोपाल संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स, आयुक्त नगर निगम, जिला पंचायत सीईओ एवं सीएमओ उपस्थित थे।

आयोग के अध्यक्ष पवैया ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका मुख्य कार्य राज्य सरकार एवं स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरीय निकायो) के बीच वित्तीय संसाधनों का बंटवारा करना होता है। बैठक में भोपाल संभाग के नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति, पारदर्शिता, गुणवत्ता तथा आर्थिक स्वावलंबन के संबंध में संभागायुक्त, कलेक्टर्स एवं जिला पंचायत सीईओ के द्वारा जिले के वित्तीय, अनुदान की विस्तृत जानकारी दी गई।

संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने सुझाव दिया कि सभी जिलों के कलेक्टर्स एवं जिला पंचायत सीईओ अपने - अपने जिलों में सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण के प्रस्ताव तैयार कर प्रेषित करें।

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि शहर के विस्तार के साथ नगरीय निकाय की सीमावर्ती ऐसी ग्राम पंचायतें जिनका शहरीकरण हो गया है लेकिन टैक्स कलेक्शन का अधिकार ग्राम पंचायत के पास नहीं है। उन ग्राम पंचायतों के सेल्फ रिवेन्यू जनरेशन के लिए अलग व्यवस्था हो। भोपाल जिले में लगभग 36 गाम पंचायतों का शहरीकरण हुआ है इनकी सेल्फ रिवेन्यू जनरेशन के लिए अलग प्रावधान की आवश्यकता है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में पर्यावरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं आपदा प्रबंधन के लिए विशेष ग्रांट दी जाए।

जिला पंचायत सीईआो इला तिवारी ने बताया कि भोपाल जिले में टैक्स सखी इंनिसियेटिव के माध्यम से टैक्स कलेक्शन मॉडल प्रारंभ किया गया है। जिसकी देश भर में सराहना की गई है। भोपाल जिले में ग्राम पंचायतों में वर्ष 2025-26 में 5 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त किया है। ग्राम पंचातयों के टैक्स कलेक्शन योग्य एसेस्ट का जीआई टैगिंग का सुझाव दिया।

सीहोर कलेक्टर बालागुरू के ने ग्राम पंचायतों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए ग्राम पंचायतों में स्थानीय स्तर पर जमीन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, बिल्डिंग परमिशन एवं लोकल टैक्स कलेक्शन को बिजनेस मॉडल के रूप में तैयार करने का सुझाव दिया।

विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने ग्राम पंचायतों में कम्युनिटी एसेस्ट, लायब्रेरी, गार्डन, गौशाला, पर्यावरण संरक्षण के लिए पुरानी बावड़ी एवं तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए विशेष ग्रांट, धार्मिक स्थलों, मेले एवं धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोकल टैक्स कलेक्शन कर ग्राम पंचायतों वित्तीय रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने का सुझाव दिया।

राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश मिश्रा ने ग्राम पंचायतों में सब अर्बन डवलपमेंट प्लानिंग पॉलिसी, लायब्रेरी, गार्डन, पुरानी बावड़ी तालाबों के संरक्षण, जंगलों में लगने वाली आग एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिए विशेष फंड एवं फायर बिग्रेड कम्युनिटी एसेट्स के साथ बड़़े धार्मिक आयोजनों एवं धार्मिक स्थलों, मेलों में आपदा प्रबंधन के लिए विशेष फंड की व्यवस्था ग्राम पंचायत स्तर पर करने का सुझाव दिया।

बैठक में रायसेन कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने का सुझाव दिया। सीहोर नगर पालिका द्वारा संपूर्ण आय व्यय की प्रणाली ऑनलाइन किये जाने पर आयोग द्वारा सराहना की गई। बैठक में सभी अधिकारियों द्वारा ग्राम पंचायतों एवं निकायों के मूल दायित्वों, स्वच्छता, पेय-जल, विकास कार्यों की गुणवत्ता तथा स्वयं के राजस्व स्त्रोतों में वृद्धि के उपायों पर विचार विमर्श किया गया। इसके साथ ही नगरीय एवं पंचायत क्षेत्रों में संभावित नवाचारों पर भी चर्चा की गई।

आयोग के सदस्य केके सिंह, ऋषि गर्ग तथा सदस्य सचिव वीरेन्द्र कुमार, नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन सहित सभी जिलों के जिला पंचायत सीईओ एवं नगरीय निकायों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर