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कुबेरेश्वरधाम पर राधा नाम संकीर्तन में उमड़ा आस्था का सैलाब, पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया अच्छे कर्म करने का संदेश

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कुबेरेश्वरधाम पर राधा नाम संकीर्तन में उमड़ा आस्था का सैलाब, पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया अच्छे कर्म करने का संदेश


कुबेरेश्वरधाम पर राधा नाम संकीर्तन में उमड़ा आस्था का सैलाब, पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया अच्छे कर्म करने का संदेश


सीहोर, 05 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम में इन दिनों भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। पांच दिवसीय हरतालिका तीज श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन शनिवार को कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कर्म के अटल सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को जीवन में अच्छे कर्म करने का संदेश दिया।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के दौरान कहा कि इस सृष्टि में कर्म के विधान से कोई भी अछूता नहीं है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान ने भी धरती पर अवतार लिया तो उन्होंने भी मानवीय मर्यादाओं और कर्म के परिणामों का सामना किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल स्वयं ही भुगतना पड़ता है। इसलिए जीवन में सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए।

जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा

कथा के चौथे दिवस पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कर्म का सिद्धांत अटल है। मनुष्य अपने जीवन में जैसा कर्म करता है, उसे उसी के अनुरूप परिणाम प्राप्त होते हैं। परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्मों से विमुख नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति के साथ जीवन में सेवा, सदाचार और अच्छे आचरण को अपनाना भी आवश्यक है। केवल भगवान का नाम लेना ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और कर्मों के माध्यम से भी धार्मिक मूल्यों को जीवन में उतारना चाहिए।

वहीं कुबेरेश्वर धाम परिसर स्थित श्री मुरली मनोहर मंदिर में शुक्रवार की रात जन्माष्टमी महोत्सव के अंतर्गत आयोजित राधा नाम संकीर्तन में हजारों श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। कुबेरेश्वरधाम परिसर स्थित श्री मुरली मनोहर मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे से रात्रि 12 बजे तक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्री मुरली मनोहर के दर्शन किए। रात्रि 7 बजे कल्लू महाराज का विशेष अभिषेक एवं श्रृंगार दर्शन हुआ। इसके पश्चात रात्रि 8 बजे चांदी के झूले में विराजमान भगवान श्री मुरली मनोहर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। मंदिर में आकर्षक श्रृंगार और धार्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

राधा नाम संकीर्तन में झूमे श्रद्धालु

रात्रि 9 बजे मंदिर परिसर में राधा नाम संकीर्तन का दिव्य आयोजन किया गया। संकीर्तन प्रारंभ होते ही वातावरण भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधा नाम के संकीर्तन में शामिल हुए और भक्ति में लीन होकर भगवान का स्मरण किया। इस दौरान पूरे परिसर में भजन और संकीर्तन की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री मुरली मनोहर के समक्ष अपनी श्रद्धा अर्पित की। आयोजन में विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

निंदा करने वाले से रहें दूर, कान भरने वालों से बचें

कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने निंदा से बचने की सीख देते हुए कहा कि निंदा करने वाले व्यक्ति से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। यदि कोई निंदा करने वाला व्यक्ति आपके पास आए तो उससे विवाद करने के बजाय उसके सामने हाथ जोड़ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि निंदा करने वाले से अधिक दूसरे की निंदा सुनने वाले को आनंद आता है। समाज में कान भरने वाले बहुत लोग मिल जाते हैं, लेकिन हमें ऐसे लोगों से बचना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि दूसरों की बुराई सुनने और करने के बजाय भगवान के नाम का स्मरण करें तथा अपने कर्मों पर ध्यान दें।

भंडारे में जाएं तो ऐसी कामना करें-हमें भी सेवा का अवसर मिले

दान और सेवा की महिमा बताते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि जब भी किसी भंडारे में भोजन प्रसादी ग्रहण करने जाएं तो भगवान से यह कामना करनी चाहिए कि हमें भी किसी दिन श्रद्धालुओं को भोजन कराने और सेवा करने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं और समाज के सहयोग से भंडारों का आयोजन किया जाता है। ऐसे आयोजनों में भोजन कराना केवल सेवा नहीं, बल्कि जरूरतमंद और श्रद्धालुओं के प्रति अपनत्व की भावना भी है। उन्होंने भगवान वामन और राजा बलि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए दान की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा था। राजा बलि अपने दान के लिए प्रसिद्ध हुए और उनकी दानशीलता आज भी धार्मिक कथाओं में उदाहरण के रूप में स्मरण की जाती है।

एक लोटा जल की भक्ति से बेटे का आर्मी में हुआ चयन

कथा के चौथे दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं की ओर से प्राप्त अनेक पत्रों का उल्लेख करते हुए भक्ति और विश्वास से जुड़े अनुभव साझा किए। इसी क्रम में उन्होंने इंदौर से आई श्रद्धालु माला के पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि माला नियमित रूप से भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करती थीं। उनके बेटे का पढ़ाई में ज्यादा ध्यान नहीं था, लेकिन परिवार ने भगवान शिव की भक्ति के साथ उसे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। युवक ने मेहनत करते हुए दसवीं कक्षा में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उसने पढ़ाई के साथ भगवान शिव की भक्ति जारी रखी और कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर कंकर-शंकर की पूजा-अर्चना भी की। परिवार के अनुसार, पढ़ाई में मेहनत और भगवान की कृपा के बाद युवक का आर्मी में चयन हो गया। इसके बाद युवक की मां सहित परिवार के सदस्य कुबेरेश्वरधाम पहुंचे और बाबा के दर्शन कर आभार व्यक्त किया।

भक्ति और विश्वास से जुड़ी ऐसी अनेक अनुभूतियां

विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि ऐसे अनेक श्रद्धालु हैं, जो भगवान शिव की भक्ति और अपने विश्वास के साथ धाम पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ भगवान की आराधना करते हैं और सफलता मिलने पर बाबा के दर्शन के लिए पुन: धाम पहुंचते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान की भक्ति के साथ कर्म और पुरुषार्थ को भी जीवन का आधार बनाना चाहिए। भक्ति मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाती है, जबकि अच्छे कर्म जीवन को सही दिशा देते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर