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मप्र के खरगोन में जल संकट से जूझ रहे किसानों ने खंडवा-वडोदरा हाईवे पर किया चक्का जाम

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मप्र के खरगोन में जल संकट से जूझ रहे किसानों ने खंडवा-वडोदरा हाईवे पर किया चक्का जाम


मप्र के खरगोन में जल संकट से जूझ रहे किसानों ने खंडवा-वडोदरा हाईवे पर किया चक्का जाम


खरगोन, 19 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में पेयजल और सिंचाई संकट से जूझ रहे किसानों का आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर दिखाई दिया। ग्राम बिलाली और आसपास के गांवों के किसानों ने तालाबों का पानी नदी-नालों और जलापूर्ति व्यवस्था में छोड़ने की मांग को लेकर खंडवा-वडोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया।

दरअसल, मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी और प्री-मानसून की मार ने किसानों को संकट में डाल दिया है। प्रदेश में मानसून की देरी के कारण जहां एक जून से अब तक सामान्य से 39% कम बारिश हुई है और खरीफ की बुवाई अटक गई है, वहीं बड़वानी में आई तेज आंधी-बारिश से केले की फसल तबाह हो गई। सूखे के इसी संकट के बीच खरगोन में नहर से पानी छोड़ने की मांग को लेकर आक्रोशित किसानों ने खंडवा-बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैलगाड़ियां खड़ी कर चक्काजाम कर दिया।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह ग्राम बिलाली सहित आसपास के सात गांवों के किसान बड़ी संख्या में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एकत्रित हुए। किसानों ने अपने वाहन सड़क पर खड़े कर यातायात पूरी तरह बाधित कर दिया। देखते ही देखते हाईवे पर ट्रक, बसों और चारपहिया वाहनों की लंबी लाइन लग गई। जाम के चलते यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा।

किसानों ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) से नहर का पानी नदी-नालों में छोड़ने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे पहले भी प्रशासन को समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। जानकारी मिलने पर नायब तहसीलदार हेमलता चौहान, एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री एस.एस. सोलंकी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं और जाम खोलने से इंकार कर दिया।

किसानों का कहना है कि क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई का संकट लगातार गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी के कारण नदी-नाले सूख चुके हैं, जिससे खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में खराब होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। ग्रामीणों को पीने के पानी के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि समस्या को लेकर वे पहले भी जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज किसानों ने आखिरकार आंदोलन का रास्ता अपनाया। राष्ट्रीय राजमार्ग जाम होने से सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को उठानी पड़ी। तेज धूप और उमस के बीच बसों और अन्य वाहनों में फंसे महिला, बच्चे और बुजुर्ग लंबे समय तक इंतजार करने को मजबूर रहे।

किसानों के अनुसार वेदा नदी लगभग पूरी तरह सूख चुकी है, जिसके कारण बिलाली, सगुन-भगूर, ललनी-टेमरनी, बेहरामपुर, लाखी सहित आसपास के गांवों में जल संकट गंभीर हो गया है। किसानों की मांग है कि क्षेत्र के तालाबों से पानी छोड़ा जाए, ताकि नदी-नालों में जल प्रवाह बढ़े, पेयजल संकट कम हो और भूजल स्तर में सुधार हो सके। इससे सिंचाई और पशुओं के लिए भी पानी उपलब्ध हो सकेगा।

इधर, बड़वानी में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसानों ने मक्का सहित अन्य फसलों की बुवाई तो शुरू कर दी है, लेकिन नहरों में समय पर पानी नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ़ गई है। इंदिरा सागर मुख्य नहर में जलस्तर कम होने के कारण कई क्षेत्रों में सिंचाई प्रभावित हुई है, जिससे बोई गई फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। तलवाड़ा डेब क्षेत्र के किसान जितेंद्र कुमावत ने बताया कि तीन एकड़ में मक्का बोने के बाद नहर का पानी बंद हो गया, जिससे अंकुरण प्रभावित हो रहा है। भारतीय किसान संघ ने किसानों को समय पर सिंचाई संबंधी जानकारी देने, नहरों का शेड्यूल सार्वजनिक करने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर