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इंदौरः संभागायुक्त ने की अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा

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इंदौरः संभागायुक्त ने की अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा


- सूचना प्रणाली और स्थानीय संसाधनों की मैपिंग आवश्यक - डॉ. खाड़े

इंदौर, 03 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में बुधवार को अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्पन्न हुई।

बैठक में संभागायुक्त ने संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स, जिला पंचायत के मुख्यपालन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों से कहा कि सूचना प्रणाली विकसित करते हुए स्थानीय संसाधनों को प्रमुखता से मैपिंग करें। जल भराव जैसी स्थिति पर नियंत्रण के लिए कम्यूनिकेशन प्लान पहली जरूरत है। साथ ही बड़े बांधों पर कंट्रोल रूम स्थापित किया जाता है, इसके अलावा जिला स्तर पर बने कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों का आपसी समन्वय कारगर साबित होगा।

बैठक में संभागायुक्त कार्यालय इंदौर से अपर कलेक्टर रोशन राय, उपायुक्त (राजस्व) सपना लोवंशी, संयुक्त आयुक्त (विकास) शिवानी वर्मा, नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक एसके सिन्हा, स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी डॉ. पूर्णिमा गड़रिया, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री अमितेश पठौते, इंजीनियर मेघा चौरे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स द्वारा अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए मानसून पूर्व की गई तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए किए अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति में जान-माल की हानि नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए समय रहते सूचना तंत्र की पुख्ता व्यवस्था की जाए। बाढ़ उन्मुख नदियों के लेवल पर निगरानी रखी जाए। बाढ़ संवेदनशील क्षेत्रों का पुन: आकलन कर राहत शिविर लगाए जाये। बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा सतत निगरानी की जाये। सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। वर्षा के पूर्व एनडीआरएफ(राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमों को तैनात किया जाए। आपदा स्थिति में बचाव के लिए ड्रोन कैमरों के माध्यम में निगरानी की जाए।

उन्होंने कहा कि वर्षाकाल के पूर्व नदी-नालों की सफाई की जाए, उनमें से गाद निकाली जाए। नालों और तालाबों के आसपास से अतिक्रमण हटाया जाये। जीर्ण-शीर्ण या जर्जर मकानों का चिन्हांकन किया जाए, खतरनाक स्थिति में नगर पालिका एवं निगमों के माध्यम से उन्हें हटाया जाए। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि बाढ़ एवं आपदा की आशंका को देखते हुए छोटे बच्चे एवं महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पूर्व में मुनादी करवायी जाए। इस कार्य में वन विभाग सहित अन्य विभागों का सहयोग लिया जाए।

बैठक में पुलिस महानिरीक्षक अनुराग ने पुलिस अधीक्षकों को निर्देश देते हुए कहा कि अतिवर्षा और बाढ़ से निपटने के पूर्व सभी अधिकारी एक्शन प्लान बनाकर सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जर्जर पुल-पुलिया, रपट, घाटों आदि स्थानों का चिन्हांकन कर सूचना बोर्ड लगाये जाये। आपदों से बचाव के संबंध में सामान्य जानकारियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इस कार्य में सोशल मीडिया का भी उपयोग किया जाए। आपदा की स्थिति में नागरिकों के पुनर्वास हेतु आसपास के धर्मशाला एवं पुनर्वास केन्द्रों की व्यवस्था की जाए। एसडीआरएफ की टीमों द्वारा ग्रामीणों को सुरक्षा संबंधित बचाव कार्यों के लिए सतर्कता उपाय बताये जाए। गोताखारों और तैराकों को हमेशा अलर्ट रखें। ग्रामीणों और पशुधन की सुरक्षा के लिए बांधों द्वारा पानी छोड़ने के पूर्व निचले इलाकों के रहवासियों को सूचित किया जाए।

बैठक में पुलिस महानिरीक्षक अनुराग ने अधिकारियों से कहा कि आगामी दिनों में मनाये जाने वाले मुहर्रम के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनायी रखी जाए। असामाजिक तत्वों के खिलाफ़ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर