इंदौरः ट्रांसमिशन लाइन कॉरिडोर में निर्माण के खतरों से आगाह करने के जन-जागरूकता अभियान को मिला व्यापक समर्थन
- क्षेत्रीय पार्षद स्वयं आगे आए, नागरिकों को किया विद्युत सुरक्षा के प्रति जागरूक
इंदौर, 20 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा इंदौर में ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में किए जा रहे निर्माण कार्यों के खतरों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
रविवार को खजराना क्षेत्र में आयोजित एक जन-जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद उस्मान पटेल स्वयं आगे आए और नागरिकों को ट्रांसमिशन लाइनों के निकट निर्माण कार्यों से होने वाले संभावित हादसों एवं जोखिमों के प्रति सचेत किया। उन्होंने नागरिकों से निर्धारित सुरक्षा दूरी बनाए रखने तथा आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की।
यह कार्यक्रम मुख्य अभियंता डी.के. अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं अतिरिक्त मुख्य अभियंता नीलम खन्ना की पहल पर घनी आबादी वाले खजराना क्षेत्र में आयोजित किया गया। जन-सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय पार्षद उस्मान पटेल ने अभियान में सक्रिय भागीदारी की और नागरिकों को विद्युत सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।
अतिरिक्त मुख्य अभियंता नीलम खन्ना तथा उनकी टीम में शामिल कार्यपालन अभियंता नम्रता जैन एवं सहायक अभियंता रवींद्र पटेल ने नागरिकों से अपील की कि वे ट्रांसमिशन लाइनों से निर्धारित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी निर्माण कार्य के दौरान विद्युत सुरक्षा संबंधी प्रावधानों एवं मानकों का पालन सुनिश्चित करें।
खजराना क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील
घनी आबादी वाले खजराना क्षेत्र में एमपी ट्रांसको की 220 केवी साउथ ज़ोन–जैतपुरा, 220 केवी इंदौर–मांगलिया, 220 केवी इंदौर–देवास, 220 केवी बिचोली–देवास तथा 132 केवी साउथ ज़ोन–महालक्ष्मी–मांगलिया अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में कुल 998 आवासीय परिसर स्थित हैं। इन परिसरों के रहवासियों को पूर्व में नोटिस जारी कर ट्रांसमिशन लाइनों के निकट निर्माण कार्यों से जुड़े जोखिमों तथा आवश्यक सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा चुकी है।
27 मीटर का न्यूनतम सुरक्षा कॉरिडोर क्यों आवश्यक है?
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए न्यूनतम 27 मीटर तथा 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए 35 मीटर के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए।
यह सुरक्षा दूरी इसलिए निर्धारित की गई है क्योंकि अधिक तापमान के दौरान विद्युत चालक तारों (कंडक्टर) में झुकाव (सैग) बढ़ जाता है तथा तेज हवा के दबाव से कंडक्टर क्षैतिज दिशा में भी झूल सकते हैं, जिसे कंडक्टर स्विंग कहा जाता है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ये मानक निर्धारित किए गए हैं।
घरेलू बिजली से 600 से 900 गुना अधिक खतरनाक
ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे या उनके प्रतिबंधित कॉरिडोर में किए गए अनधिकृत निर्माण सामान्य घरेलू विद्युत कनेक्शन की तुलना में 600 से 900 गुना अधिक खतरनाक हो सकते हैं। ऐसे अतिक्रमण न केवल मानव जीवन के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करते हैं, बल्कि इनके कारण क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित हो सकती है।
एमपी ट्रांसको ने जनहित एवं जन-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा निर्धारित विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए ही निर्माण कार्य करें तथा ट्रांसमिशन लाइनों से निर्धारित सुरक्षा दूरी बनाए रखें।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

