भारत एक समृद्ध देश था, इसीलिए इसे सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता थाः इंदर सिंह परमार
- उच्च शिक्षा मंत्री ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का किया शुभारंभ
सतना, 09 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारत देश कभी गरीब नहीं था। भारत एक समृद्ध देश था और इसे सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ था। किसान आत्मविश्वासी और सामर्थ्यवान था। भारत में शिक्षित समाज था। भारत की संस्कृति और परंपराएं मजबूत थी। विज्ञान युक्त भारतीय समाज की कार्यशैली थी।
उन्होंने कहा कि भारत की इसी समृद्धि के कारण ही विदेशी लुटेरे, मुगल और अंग्रेज भारत आए तथा समृद्ध भारत को हर स्तर पर लूटने का प्रयास किया। संस्कृति, परंपराओं, वेदों शिक्षा केंद्रों, खेल परिसरों आदि को नष्ट करने का उपक्रम ही नहीं किया, अपितु भारतीय समाज के शिक्षित न होने, रूढ़िवादी होने, अंधविश्वासी होने का दुष्प्रचार भी किया। अब समय आ गया है जब हम भारत के महानतम ज्ञान एवं भारतीय समाज के बारे में भ्रांतियां को दूर करने के सशक्त उपायों को करते हुए देश की आजादी 100वीं वर्षगांठ 2047 को विकसित भारत के महानतम लक्ष्य के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के वैशिष्ट्य को पूरी क्षमता से मनाए।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार सोमवार को सतना जिले के चित्रकूट स्थित महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने की। मुख्य वक्ता के रूप में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष रहे प्रो. एसपी गौतम और विशिष्ट अतिथि के रूप में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया रहे।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने आगे कहा कि भारतीय समाज की अवधारणा को समझने और पुनः स्मरण करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक उपयुक्त अवसर है कि जब हम वैज्ञानिक शोध करें और यदि हमें सामाजिक मान्यताओं में रूढ़िवाद, अंध विश्वास दिखे, तो हमें छोड़ना पड़ेगा। हम युगानुकल परिवर्तन के पक्षधर हैं।
इसके पूर्व मंत्री परमार ने एविएशन विंग का भ्रमण कर गतिविधियों को देखा तथा समझा। उन्होंने उड़ान अकादमी के अधिकारियों से विचार विमर्श कर कार्यक्रम के प्रगति की जानकारी ली।
ग्रामोदय विश्वविद्यालय कैंपस में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के शाश्वत प्रेरणाश्रोत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संस्थापक कुलाधिपति भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ हुआ। मां वीणावादिनी सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। सरस्वती वंदना विश्वविद्यालय की छात्राओं ने प्रस्तुत किया। अपने स्वागत उद्बोधन में ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो आलोक चौबे ने कहा कि विकास सुविधाओं का मोहताज नहीं होता। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रो. ललित कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ भरत व्यास, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ आर पी सिंह, पूर्व कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा, पूर्व कुलपति प्रो कपिल देव मिश्रा सहित शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
पंचवटी घाट पर मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया श्रमदान
इससे पहले मंत्री इंदर सिंह परमार ने सोमवार को चित्रकूट प्रवास के दौरान पवित्र पंचवटी घाट पर माँ मंदाकिनी नदी के स्वच्छता अभियान में भाग लेकर श्रमदान किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं घाट परिसर में सफाई करते हुए लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर मंत्री परमार ने कहा कि चित्रकूट धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ बहने वाली माँ मंदाकिनी नदी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए इसकी स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी से सफल होने वाला जन आंदोलन है। स्वच्छता अभियान के दौरान मंत्री परमार ने घाट परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर घाट की सफाई की और लोगों से अपील की कि वे नदी में कचरा न डालें तथा आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। सभी ने मिलकर माँ मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए श्रमदान करते हुए स्वच्छता का संदेश दिया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

