इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाई कोर्ट सख्त, आवाज में 25 प्रतिशत कमी लाने के निर्देश
- कचरा गाड़ियों का शोर होगा कम, हर थाने में लगेंगे साउंड मीटर
इंदौर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने शहर में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर नगर निगम और पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। कचरा संग्रहण वाहनों से होने वाले शोर को कम करने के लिए नगर निगम को आवाज में कम से कम 25 प्रतिशत कमी लाने अथवा निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर ध्वनि रखने को कहा गया है।
वहीं, शहर के प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि मापने वाले उपकरण उपलब्ध कराने और थानों के संपर्क नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोग शोर से जुड़ी शिकायतें सीधे पुलिस तक पहुंचा सकें।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जयकुमार पिल्लई की खंडपीठ ने सोमवार को याचिकाकर्ता अमिताभ उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। अदालत ने नगर निगम को तीन सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कचरा गाड़ियों के आने की जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए लाउडस्पीकर की आवाज जरूरत से ज्यादा तेज रखना उचित नहीं है।
साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रकाशित करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने साइलेंस जोन की सूची प्रकाशित करने के संबंध में पहले दिए गए आदेश का समुचित पालन नहीं होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को राज्य शासन को व्यापक प्रसार वाले दैनिक समाचार पत्रों में साइलेंस जोन की सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान शासन की ओर से पूरी सूची के स्थान पर समाचार पत्रों के कुछ अंश पेश किए गए, जिनमें साइलेंस जोन का उल्लेख था।
खंडपीठ ने इसे पूर्व आदेश का पर्याप्त अनुपालन नहीं माना। अदालत ने निर्देश दिया कि साइलेंस जोन की संपूर्ण सूची व्यापक प्रसार वाले दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाए। इसके साथ ही आम नागरिकों से उन स्थानों के बारे में सुझाव भी मांगे जाएं, जिन्हें साइलेंस जोन घोषित किया जाना चाहिए, लेकिन वे वर्तमान सूची में शामिल नहीं हैं।
उपकरण मौजूद, लेकिन कार्रवाई में नहीं हुआ इस्तेमाल
सुनवाई के दौरान खजराना के सहायक पुलिस आयुक्त आशीष पटेल ध्वनि प्रदूषण मापने वाला उपकरण लेकर अदालत में उपस्थित हुए। हालांकि, कोर्ट को बताया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर शोर का स्तर मापने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अब तक इस उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
इस पर अदालत ने कहा कि उपकरणों की उपयोगिता तभी है, जब उन्हें शिकायतों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराया जाए। इसी के मद्देनजर इंदौर के सभी पुलिस थानों में ध्वनि मापक उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
अदालत ने थानों के संपर्क नंबर समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के साथ इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराने को कहा है। इससे ध्वनि प्रदूषण से परेशान नागरिक संबंधित थाने से सीधे संपर्क कर सकेंगे और शिकायत दर्ज कराने में उन्हें आसानी होगी।
नवरात्रि-दशहरे के दौरान शोर पर भी जताई चिंता
उच्च न्यायालय ने नवरात्रि और दशहरे के दौरान शहर में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। आदेश में कहा गया कि उत्सव के दौरान शोर अनियंत्रित रहा और पुलिस की ओर से उसके स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण होता दिखाई नहीं दिया।
खंडपीठ ने संबंधित प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि विभिन्न पुलिस थानों में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित प्राप्त शिकायतों का ब्योरा अदालत में प्रस्तुत किया जाए। इसके अलावा पुलिस ने जिन मामलों में स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई की है, उनकी जानकारी भी न्यायालय के समक्ष रखनी होगी।
हर वार्ड से दो स्वयंसेवक करेंगे निगरानी
ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अदालत ने वार्ड स्तर पर नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की व्यवस्था भी सुझाई है। प्रत्येक थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र के हर वार्ड से दो स्वयंसेवक नामित करने होंगे। ये स्वयंसेवक शोर फैलाने वाले व्यक्तियों या वाहनों की जानकारी तत्काल पुलिस को दे सकेंगे। आवश्यकता पड़ने पर वे मोबाइल फोन से संबंधित घटना का वीडियो भी बना सकेंगे।
अदालत ने इस समस्या के एक व्यावहारिक पहलू पर भी ध्यान दिया। कई लोग शोर से परेशान होने के बावजूद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें आशंका रहती है कि शिकायत के बाद उन्हें कानूनी प्रक्रिया में शामिल होना पड़ेगा।
ऐसी स्थिति में वार्ड स्तर पर नामित स्वयंसेवक आम नागरिकों और पुलिस के बीच संपर्क सूत्र का काम करेंगे। उनसे जानकारी मिलने पर पुलिस को कानून के अनुसार जल्द कार्रवाई करनी होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

