home page

(अपडेट) मप्र का हेड कॉन्स्टेबल निकला 30 करोड़ का आसामी, लोकायुक्त ने 15 ठिकानों पर मारे छापे

 | 
(अपडेट) मप्र का हेड कॉन्स्टेबल निकला 30 करोड़ का आसामी, लोकायुक्त ने 15 ठिकानों पर मारे छापे


इंदौर/देवास, 14 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार सुबह पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी), इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक (हेड कॉन्स्टेबल) फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में 15 से अधिक ठिकारनों पर कार्रवाई की। शाम तक चली इस कार्रवाई में आरोपी के पास करीब 30 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति मिली है। लोकायुक्त के अनुसार, यह उसकी आंकी गई आय से करीब 568 फीसदी ज्यादा है।

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, देवास पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जुटाने की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों को लेकर लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने सुबह करीब 6 बजे इंदौर और देवास स्थित 15 ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। इनमें देवास में 11 और इंदौर में 4 ठिकानें शामिल हैं। लोकायुक्त के मुताबिक, शुरुआती जांच में करीब 30 करोड़ रुपए की संपत्ति का आकलन किया गया है। जांच में जमीन, प्लॉट और मकानों से जुड़ी संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है।

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, फिरोज खान मूल रूप से उज्जैन का रहने वाला है। उसके पिता पुलिस विभाग में थे। पिता का तबादला होने के बाद परिवार देवास आ गया। यहीं फिरोज की पढ़ाई हुई। बाद में वह भी पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर भर्ती हो गया। साल 2002 में उसकी पोस्टिंग देवास में हुई। इसके बाद उसकी नौकरी का ज्यादातर समय देवास में ही बीता। इस दौरान कई बार तबादले हुए, लेकिन अधिकारियों के साथ अटैचमेंट और ड्राइवर की ड्यूटी के कारण वह लंबे समय तक देवास में ही पोस्टेड रहा।

फिरोज ने सीएसपी स्तर के अधिकारियों समेत अन्य पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां भी चलाईं। वह पुलिस लाइन में भी पोस्टेड रहा। करीब दो साल पहले उसका तबादला इंदौर हो गया। फिलहाल वह वहां पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पोस्टेड है। बताया जाता है कि चालक की ड्यूटी के दौरान वह अक्सर वर्दी में नजर नहीं आता था। हालांकि, उसके तबादलों और अटैचमेंट की पूरी जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी। अब जांच में देवास में उसकी लंबे समय तक रही तैनाती और इस दौरान खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा अहम माना जा रहा है।

लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने बताया कि फिरोज खान को नौकरी के दौरान वेतन से करीब 75 लाख रुपए मिलने का अनुमान है। अन्य स्रोतों से होने वाली आय को जोड़कर उसकी कुल आय करीब 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई है, लेकिन शुरुआती जांच में उसके पास करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का पता चला है।

लोकायुक्त के अनुसार, यह उसकी अनुमानित आय से करीब 568 फीसदी ज्यादा है। यह शुरुआती आकलन है। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंक अकाउंट, इन्वेस्टमेंट और संपत्तियों की कीमत के आधार पर इस आंकड़े बदल भी सकते है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि फिरोज की सरकारी नौकरी से हुई कमाई और उसके परिवार और परिचितों के नाम पर मिली संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। अगर संपत्ति दूसरे कारोबार से हुई कमाई से खरीदने का दावा किया जाता है, तो जांच एजेंसी उसकी कमाई के सोर्सेस और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच करेगी।

जांच में सामने आया है कि फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग नाम की फर्म है। इस फर्म के बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपए के लेन-देन की जानकारी मिली है। लोकायुक्त अब जांच कर रही है कि यह फर्म किस तरह का कारोबार करती थी, इसमें पैसा कहां से आया और इस रकम का इस्तेमाल किन संपत्तियों को खरीदने में किया गया। इसके अलावा, फिरोज की परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर रोशनी सेल्स एंड सर्विस फर्म भी संचालित होने की जानकारी मिली है। जमीन खरीदने में कथित भूमिका सामने आने के बाद लोकायुक्त ने रोशनी वर्मा को भी आरोपी बनाया है। जांच में रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की फर्म के जरिए फिरोज के रियल एस्टेट में निवेश करने की जानकारी भी सामने आई है।

अब लोकायुक्त इन फर्मों के दस्तावेजों, बैंक अकाउंट में हुए लेन-देन और खरीदी गई संपत्तियों की जांच कर रही है। इसके जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि इन फर्मों का संचालन वास्तव में कौन करता था और उनसे होने वाली कमाई का संपत्तियों की खरीद से क्या संबंध है।

फिरोज खान पर यह भी आरोप है कि वह पुलिस विभाग में होने का रौब दिखाकर देवास में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में दखल देता था। इसके अलावा उस पर दूसरे लोगों के जरिए जमीनों का सौदा करने और परिवार के सदस्यों के साथ परिचित महिलाओं के नाम पर संपत्तियां खरीदने के भी आरोप हैं।

लोकायुक्त की जांच में देवास के इटावा क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा प्लॉट, मकान और व्यावसायिक संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। जांच में देवास और इंदौर में रहने वाली महिला परिचितों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की जानकारी भी शामिल है। अब लोकायुक्त इन संपत्तियों के दस्तावेजों, खरीद के समय किए गए भुगतान और असल में पैसा लगाने वाले व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर